आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही किस दिशा में जाती है, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं। विपक्षी एकता की परीक्षा भी इस सत्र में होगी, क्योंकि अलग-अलग दलों के अपने-अपने मुद्दे और प्राथमिकताएं हैं। वहीं सरकार के सामने चुनौती है कि वह विपक्ष को बातचीत की मेज पर लाए और संसद की गरिमा बहाल करते हुए जनहित के कामकाज को आगे बढ़ाए। लोकतंत्र में संवाद और सहमति ही समस्याओं का समाधान है, टकराव नहीं। उम्मीद है कि दोनों पक्ष जनभावनाओं का सम्मान करते हुए संसद को सुचारु रूप से चलने देंगे।