संसद सत्र की शुरुआत के साथ ही नीट परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की बर्बर कार्रवाई ने राजनीतिक तापमान बढ़ा दिया है। विपक्ष ने सरकार पर निर्दोष छात्रों के साथ क्रूरता का आरोप लगाते हुए गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे और प्रधानमंत्री से माफी की मांग तेज कर दी है। जंतर मंतर से लेकर संसद भवन तक विपक्षी दल एकजुट होकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्र न्याय मार्च के दौरान छात्रों पर छर्रे वाली बंदूक के इस्तेमाल को लेकर सीधे गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर लिया है। वहीं कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने छात्रों की पिटाई की तुलना पागल कुत्तों से भी बदतर बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सार्वजनिक माफी की मांग की है। माकपा नेता ने भी गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग दोहराते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर ऐसी बर्बरता लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर पहले से ही विपक्ष के हमले जारी थे, अब छात्रों पर पुलिस कार्रवाई ने विपक्ष को नया हथियार दे दिया है। छात्र संगठनों का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने बर्बरता से लाठीचार्ज किया और छर्रे वाली बंदूक का इस्तेमाल किया, जिसमें कई छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं। संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर हंगामे के आसार हैं। विपक्षी दल संयुक्त रूप से गृह मंत्री के इस्तीफे का प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं। सरकार भी नीट विवाद और अन्य मुद्दों पर विपक्ष के हमलों का जवाब देने की तैयारी में जुटी हुई है। इस पूरे प्रकरण ने सरकार की छात्र विरोधी छवि को और मजबूत किया है। विपक्ष इसे आगामी चुनावों में बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। सरकार के लिए अब दोहरी चुनौती है - नीट परीक्षा की विश्वसनीयता बहाल करना और छात्रों पर बल प्रयोग को न्यायसंगत ठहराना। आने वाले दिनों में संसद से सड़क तक यह संघर्ष और तेज होने के आसार हैं, जिससे राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है।