ग्रेटर नोएडा की कलाधाम कॉलोनी में एक हृदयविदारक घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। यहां निर्माणाधीन स्थल पर बने 15 फुट गहरे पानी भरे गड्ढे में गिरकर छह वर्षीय मासूम की दर्दनाक मौत हो गई। घटना शनिवार शाम की बताई जा रही है जब बालक अपने घर के पास खेल रहा था और अचानक असुरक्षित गड्ढे में जा गिरा। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद बच्चे के शव को बाहर निकाला, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। इस दुखद घटना ने न केवल परिजनों को गहरा आघात दिया है बल्कि प्रशासनिक लापरवाही पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही लापरवाही बरतने के आरोप में दो अधिकारियों को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का घोर उल्लंघन किया गया था। गहरे गड्ढे के चारों ओर न तो कोई बाड़ लगाई गई थी और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए गए थे। बरसात के पानी से भरे इस गड्ढे को खुला छोड़ देना घोर लापरवाही की श्रेणी में आता है। पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन सुरक्षा व्यवस्था न के बराबर है। कई बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार विभागों ने कोई संज्ञान नहीं लिया। लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि यदि समय रहते उचित कदम उठाए गए होते तो आज एक मासूम की जान बच सकती थी। घटना के बाद से कॉलोनी में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रशासन ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। इस घटना ने शहरी विकास में सुरक्षा मानकों की अनदेखी की पोल खोल दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण स्थलों पर गहरे गड्ढों, खुले टैंकों और जलभराव वाले क्षेत्रों को सुरक्षित करना अनिवार्य होना चाहिए। नगर निगम और विकास प्राधिकरण को नियमित निरीक्षण कर ऐसे खतरों को समय रहते चिह्नित करना चाहिए। साथ ही ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही तय करने के लिए कड़े कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता है। इस दुखद घटना से सबक लेते हुए प्रशासन को तत्काल प्रभाव से सभी निर्माण स्थलों का सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए। लापरवाह अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी हृदयविदारक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। एक मासूम की असमय मौत न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है बल्कि पूरे समाज और व्यवस्था के लिए शर्मनाक है। अब समय आ गया है कि विकास के नाम पर सुरक्षा से समझौता करना बंद किया जाए और हर नागरिक, विशेषकर बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।