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Breaking News: कॉकरोच जनता पार्टी ने वापस लिया आंदोलन, केंद्र ने मानी मांगें; धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, प्राथमिकी रद्द होंगी
🕒 2 hours ago

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने केंद्र सरकार द्वारा अपनी प्रमुख मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद अपना विरोध प्रदर्शन वापस ले लिया है। लंबे समय से चले आ रहे इस गतिरोध का समाधान तब निकला जब केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और सरकार ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी प्राथमिकी को रद्द करने के साथ मुआवजा देने की घोषणा की। दोनों पक्षों की ओर से बुलाई गई संयुक्त प्रेस वार्ता में इस समझौते की औपचारिक घोषणा की गई, जिससे कई हफ्तों से जारी तनावपूर्ण स्थिति का अंत हो गया। संयुक्त प्रेस वार्ता में सीजेपी के नेताओं और सरकार के प्रतिनिधियों ने पांच सूत्रीय घोषणापत्र पर सहमति जताई। इस घोषणापत्र में प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा, उनकी मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई, दर्ज मुकदमों की वापसी, आर्थिक मुआवजा और भविष्य में संवाद की व्यवस्था शामिल है। सरकार ने स्वीकार किया कि प्रदर्शनकारियों की कुछ मांगें जायज थीं और उनके समाधान में देरी नहीं होनी चाहिए थी। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को इस दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि प्रदर्शनकारी लंबे समय से उनके इस्तीफे की मांग कर रहे थे। समझौते के तहत केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया है कि आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाएगा और उनके खिलाफ दर्ज सभी मामले वापस लिए जाएंगे। साथ ही, आंदोलन में घायल हुए लोगों और मारे गए लोगों के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। सरकार ने यह भी वादा किया है कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए एक स्थायी संवाद तंत्र स्थापित किया जाएगा, ताकि छोटे-मोटे मुद्दे बड़े आंदोलन का रूप न ले सकें। सीजेपी नेताओं ने इस समझौते को जनता की जीत बताया है और कहा है कि शांतिपूर्ण संघर्ष की शक्ति एक बार फिर सिद्ध हुई है। उन्होंने सरकार के सकारात्मक रुख की सराहना करते हुए उम्मीद जताई कि घोषणापत्र के सभी बिंदुओं पर ईमानदारी से अमल होगा। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से केंद्र सरकार की छवि पर असर पड़ा है, लेकिन समय रहते मामला सुलझा लेने से बड़े संकट को टाल दिया गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि घोषणापत्र में किए गए वादों को कितनी तेजी और पारदर्शिता से लागू किया जाता है। सीजेपी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार अपने वादों से मुकरती है तो आंदोलन फिर से शुरू किया जा सकता है। दूसरी ओर, सरकार ने भरोसा दिलाया है कि वह सभी मांगों को चरणबद्ध तरीके से पूरा करेगी। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में संवाद और समझौता ही टकराव का एकमात्र रास्ता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 25 Jul 2026