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Breaking News: कोलकाता हवाई अड्डे की मस्जिद पर विवाद: सुरक्षा के नाम पर प्रतिबंध, सुवेन्दु अधिकारी ने दिया समर्थन
🕒 1 hour ago

कोलकाता के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की historic मस्जिद को अस्थायी रूप से बंद करने का फैसला हाल ही में केंद्र और राज्य सरकार के बीच सुरक्षा‑परिप्रेक्ष्य में आया है। इस निर्णय के बाद सुप्रीम कोर्ट के पास कई शरणार्थी व यात्रियों की शिकायतों के बाद, विधानसभा में ट्रेड यूनियन नेता और विधानसभा प्रमुख सुवेन्दु अधिकारी ने इस कदम को राष्ट्रीय सुरक्षा के संरक्षण के रूप में समर्थन दिया। सुवेन्दु अधिकारी ने कहा कि इस मस्जिद पर प्रवेश को रोकना केवल धार्मिक कारणों से नहीं, बल्कि संभावित सुरक्षा खतरों को रोकने के लिए आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि हवाई अड्डे पर बड़े पैमाने पर अवेयर नेटवर्क और संवेदनशील एयरक्राफ्टस की आवाज़ को देखते हुए, कोई भी असुरक्षित प्रवेश बिंदु राष्ट्रीय सुरक्षा को हानि पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा, "हमारी प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और विमानन संचालन की सुगमता है, इसलिए इस मस्जिद को सीमित क्षेत्र में रखना आवश्यक था।" मस्जिद, जो हवाई अड्डे के बडे़ टर्मिनल के पास स्थित है, लगभग सौ साल पुरानी है और यात्रियों के लिए प्रार्थना स्थल के रूप में उपयोग में आती थी। लेकिन अड्डे के विस्तार कार्य, नई रनवे योजना और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुसार इसकी जगह को पुनः संरचित करने पर विचार किया गया। सुरक्षा विशेषज्ञों ने बताया कि अड्डे के आसपास कई बार प्रकट होने वाले असुरक्षा जोखिम, जैसे सैन्य उपकरणों की चोरी और असामान्य हाई‑टेक गैजेट्स का उपयोग, इस फैसले को औचित्यपूर्ण बनाते हैं। इस फैसले पर स्थानीय मुसलमान समुदाय ने आश्चर्य और निराशा व्यक्त की। कई नेता और सामाजिक कार्यकर्ता इस कदम को धार्मिक उत्पीड़न का रूप मानते हुए, संवाद तथा समझौते की पुकार कर रहे हैं। कई प्रमुख राजनीतिक व्यक्तियों ने इस मुद्दे पर शांति एवं धार्मिक समाधान की मांग की है, जबकि कुछ ने सुवेन्दु अधिकारी के बयान को समर्थन दिया है। इस बीच, हवाई अड्डे के प्रबंधन ने कहा कि यह निर्णय अस्थायी रूप से लिया गया है और भविष्य में उचित समाधान मिलने पर मस्जिद को पुनः खोला जा सकता है। निष्कर्ष स्वरूप, कोलकाता हवाई अड्डे की मस्जिद पर लगाए गए प्रतिबंध ने सुरक्षा, धर्म और जनता के अधिकारों के बीच जटिल समीकरण प्रस्तुत किया है। सुवेन्दु अधिकारी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा के कवरेज में रख कर समर्थन दिया, जबकि कई सामाजिक संगठनों ने सामुदायिक संवाद की आवश्यकता पर बल दिया। इस विवाद को सुलझाने के लिए विविध हितधारकों के बीच खुली चर्चा और संतुलित समाधान की आवश्यकता स्पष्ट है, जिससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ हो बल्कि धार्मिक भावनाओं का भी सम्मान हो सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 13 Jul 2026