भारतीय रेलवे की एसी क्लास कोचों में लेनन चोरी की समस्या अब सतह पर नहीं, बल्कि गहन रूप से उभर कर सामने आई है। कोषीय अधिकार सूचना (आरटीआई) के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, केवल चार वर्षों में 1.27 करोड़ बिस्तर की चादरें, तौलिए, कंबल और तकिए चोरी हो चुके हैं। इस विध्वंसात्मक चोरी ने न केवल यात्रियों की सुविधा पर बुरा असर डाला है, बल्कि रेलवे को भारी आर्थिक नुकसान भी पहुंचाया है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग एक सौ चार अरब रुपए तक पहुँचती है। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2022 से लेकर 2025 तक हर साल लगभग 30 लाख से अधिक लिनन आइटम्स चोरी हो रहे हैं। बड़ी संख्या में एसी कोचों में मौजूद बिस्तर से लेकर तौलिए, ब्लैंकेट, तकिए, तकियों के कवर तक सभी अनिवार्य सुविधाएं पैसेंजरों के लिये महंगे किराए के साथ दी जाती हैं, परन्तु इनकी चोरी से इन सुविधाओं की कमी स्पष्ट हो रही है। यात्रियों को अक्सर बिन बदले बिस्तर या बिना तकिये के सवार होना पड़ता है, जिससे उनकी यात्रा का सुखद अनुभव बाधित हो जाता है। रिपोर्ट बताती है कि इस समस्या के समाधान के लिए रेलवे ने कई कदम उठाए हैं, परंतु अभी तक प्रभावी परिणाम नहीं देखे जा रहे हैं। कोचों में सीसीटीवी कैमरे लगाना, सफाई कर्मचारियों की निगरानी बढ़ाना और चोरी-रोधी टैग लगाना जैसी उपायों को अपनाया गया है, परन्तु चोरी करने वाले यात्रियों की चतुराई और तकनीकी साधनों ने इन प्रयासों को असफल बना दिया है। कुछ मामलों में, कर्मचारियों के अंदर ही लीनन चुराने की अफवाहें फैल रही हैं, जिससे जांच प्रक्रिया और जटिल हो गई है। आर्थिक नुकसान के संदर्भ में, विभिन्न विश्लेषकों का मानना है कि इस चोरी की वजह से भारतीय रेलवे को हर साल लगभग 25 से 30 अरब रुपए का नुकसान हो रहा है। यह आंकड़ा विशेषकर उन यात्रियों के लिए निराशाजनक है, जो एसी कोच में प्रीमियम शुल्क देकर आराम की उम्मीद करते हैं। साथ ही, रेल मंत्रालय को इस गहरी गिरावट को रोकने के लिये कड़े नियम और सख्त दण्डात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है। निष्कर्ष स्वरूप, चार साल में 1.27 करोड़ लीनन आइटम्स की चोरी भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों को उजागर करती है। यह समस्या केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है, क्योंकि इससे यात्रियों का भरोसा धीरे-धीरे टूट रहा है। तत्काल उपायों में कोचों की नियमित जांच, ट्रैकिंग टैग एवं इलेक्ट्रॉनिक लॉक प्रणाली को लागू करना, और चोरी में संलिप्त कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही शामिल होनी चाहिए। तभी भारतीय रेलवे फिर से यात्रियों को बेहतरीन और सुरक्षित सफर प्रदान कर पाएगा।