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Breaking News: वियतनाम में नाव दुर्घटना में 15 भारतीय यात्रियों की असहाय लाशें घर लाने की तैयारी, शेष बचे साथी लौटे भारत
🕒 1 hour ago

वियतनाम के लोकप्रिय पर्यटनस्थल फु क्वोक द्वीप के पास एक तेज़ गति वाली नाव में सवार 31 भारतीय पर्यटकों के समूह को 15 अगस्त को एक भयानक दुर्घटना ने झोंक दिया। तेज़ हवाओं और ऊँचे लहरों के कारण नाव का तिरछा हो जाना और अंततः बिखर कर डूबना हुआ, जिससे 15 यात्रियों की मौत हो गई और बचे 16 यात्रियों को गंभीर चोटें आईं। भारतीय दूतावास ने तुरंत इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए शोक संदेश जारी किया और मृतकों के परिजनों को सांत्वना प्रदान करने के साथ-साथ बचे यात्रियों के सुरक्षित प्रस्थान की व्यवस्था की। दुर्घटना के बाद त्वरित बचाव कार्य शुरू हुआ। वियतनाम की सशस्त्र सेना, स्थानीय नाविकों और समुद्र बचाव दल ने शेष बचे यात्रियों को बचाने में सहयोग किया। बचे हुए 16 भारतीय यात्रियों को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ से अधिकांश को गंभीर चोटों के बावजूद स्थिर स्थिति घोषित की गई। एक यात्री को जटिल चोटों के कारण उपचार के लिये विशेष देखभाल की आवश्यकता पड़ी और वह अभी भी स्थानीय अस्पताल में भर्ती है। डॉक्टरों ने बताया कि पर्याप्त प्रथम उपचार और सीपीआर के बावजूद कई यात्रियों की हालत गंभीर थी, जिससे मौत का अंजाम नहीं बँटा। वियतनाम सरकार ने दुर्घटना की पूरी जांच का आश्वासन दिया और नाव के कप्तान को गिरफ्तार कर ले लिया है। जांच के अनुसार, तेज़ गति से चल रही नाव ने सुरक्षा मानकों का उल्लंघन किया, जिससे लहरों के साथ तालमेल नहीं बिठा पाया और अंततः हादसा हुआ। भारतीय प्रवासियों के सहयोगियों और यात्रा एजेंसियों ने इस घटना पर पूर्ण यातायात सुरक्षा नियमों के पालन की महत्ता दोहराई। साथ ही, भारतीय दूतावास ने मृतकों की पहचान की प्रक्रियाओं को तेज किया और उनके अंतिम संस्कार के लिये आवश्यक सभी कृत्यों को पूर्ण किया। वर्तमान में मृतकों की असहाय लाशें वियतनाम के अधिकारियों द्वारा सुरक्षित रूप से भारत भेजने के चरण में हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि लाशों को विशेष काफ़न में लिपेटकर भारत की ओर भेजा जाएगा और परिवारों को तत्काल सूचना दी जाएगी। शेष बचे यात्रियों को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर विशेष भारतीय एयरलाइन द्वारा लाया जाएगा, जहाँ उन्हें पुनर्वास और मनोवैज्ञानिक सहायता प्रदान की जाएगी। इस अपार दुख की घड़ी में विदेशियों की सुरक्षा, सहानुभूति और त्वरित सहायता का महत्व स्पष्ट दिखता है। अंत में, इस त्रासदी ने यात्रा के दौरान सुरक्षा नियमों के कठोर पालन, मौसम स्थितियों के प्रति सतर्कता और एक-दूसरे की सहायता के महत्व को दोबारा रेखांकित किया है। भारतीय यात्रियों के परिवारों को गहरा शोक व्यक्त किया गया, साथ ही बचे यात्रियों को शीघ्र स्वस्थ होने और अपने जीवन को फिर से सामान्य राह पर ले जाने की कामना की गई।

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✍️ By Pradeep Yadav | 13 Jul 2026