हिंदुस्तान के तेलंगाना राज्य में एक और भयावह घटना ने जनमानस को हिलाकर रख दिया है। पिछली शाम, पुलिस ने एक ऐसे व्यक्ति को पकड़ा जो पीओसीएसओ (बाल यौन उत्पीड़न) मामले में अभियुक्त था और अब वह अपनी पत्नी, दो बच्चों और शिकायतकर्ता के परिवार के पाँच अतिरिक्त सदस्यों को मार डालने के जुर्म में दागा गया। इस नरसंहार में कुल सात लोग मारे गये, जिनमें पीड़िता की बेटी भी शाम को 17 वर्ष की आयु में शहरी क्षेत्र के पास स्थित अपने घर में गोली मारकर बेताब मार दी गई। घटना के पीछे का कारण अत्यंत जटिल और गभिरा है। बताया जा रहा है कि यह पुरुष, जो पहले ही पीओसीएसओ के तहत एक महत्त्वपूर्ण केस में जेल से मिलने के बाद बाईल पर रिहा किया गया था, अपनी ही पत्नी और दो नन्हें बच्चों के साथ झगड़े में पड़ गया। उसने शराब के नशे में आकर अपने घर में अपने ही परिवार को गंदे हथियारों से मार डाला। इसके बाद उसने उसी इलाके में रहने वाले शिकायतकर्ता के दो भाई-बहन और एक मित्र को भी गोली मार दी। उनके साथ ही, एक और अनजान युवक को भी इस हिंसक क़दम में शामिल किया गया, जिससे कुल सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि इस व्यक्ति ने पहले ही अपनी पत्नी और बच्चों को मारते समय यातना के कई अटकलें चलायीं थीं, और उसके बाद वह शिकायतकर्ता के घर के बाहर आ कर उनका सामना करने की कोशिश कर रहा था। जब उसने अभिशाप के द्वारा दिया गया परिवार को मार डाला, तो उसे खुद पर भरोसा नहीं था और वह शरिर में तेज आँसुओं के साथ भाग गया। इस बीच, अपराध के बाद पुलिस ने तुरंत पड़ोसियों की मदद ले ली और अपने फ़ोन से एक अभिज्ञापक को कॉल किया जिससे इस अपराधी को पकड़ा जा सका। वडवाक बशकरिम के अनुसार, इस परिप्रेक्ष्य में क़ानून का कड़ा सज़ा होनी चाहिए। संबंधित मामले में अभी भी कई सवाल बचे हैं: कैसे एक पीओसीएसओ केस के आरोपी को बाइल पर छोड़ दिया गया, जबकि वह पहले ही अत्याचारी प्रवृत्ति दिखा चुका था? क्या कानूनी प्रक्रिया में कोइ चूक रही है जिसके कारण वह फिर से हिंसक कार्यों की ओर मुड़ गया? इस मामले की जांच अभी भी जारी है और पुलिस ने कहा है कि आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर एकत्रित किए गए साक्ष्य को अदालत में पेश किया जाएगा। इस हृदयविदारक घटना ने समाज में सुरक्षितता के प्रश्न को फिर से उठाया है और यह स्पष्ट किया गया कि पीडितों की सहायता हेतु कड़ी निगरानी और तेज़ न्यायिक प्रक्रिया आवश्यक है। सरकार और सामाजिक संगठनों से अपील की जा रही है कि पीओसीएसओ जैसे संवेदनशील मामलों में बाइल की शर्तें कड़ाई से लागू हों, ताकि ऐसे मामलों में दुर्व्यवहार पुनरावृत्ति न हो। इस त्रासदी को रोकने के लिये सभी एजेंसियों को मिलकर कार्य करना चाहिए, ताकि भविष्य में फिर कभी ऐसा रक्तरंजित अपराध न हो।