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Breaking News: अमेरिका में एच‑1बी व PERM वीजा धोखाधड़ी की कड़ी जाँच, कोग्निज़ेंट सहित कई कंपनियों पर छिड़ी तपिश
🕒 2 hours ago

संयुक्त राज्य सरकार ने हाल ही में एच‑1बी तथा PERM स्थायी कार्य वीज़ा प्रणाली में भारी धोखा चलाने के मामलों की व्यापक जाँच शुरू कर दी है। इसमें कई बड़े विदेशी IT सेवा प्रदाताओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें भारतीय oorspr व कंपनी कोग्निज़ेंट भी शामिल है। सरकार के इस कदम का उद्देश्य वीज़ा प्रक्रिया को स्वच्छ बनाना, काले धन को रोकना और अमेरिकी श्रम बाजार में असमानता को समाप्त करना है। दक्षिणी राज्यों के एक विशेष गठबंधन द्वारा संचालित इस जांच में यह देखा गया कि कुछ नियोक्ताओं ने योजनाबद्ध रूप से नौकरी के वास्तविक विवरण में बदलाव कर, अवैध रूप से विदेशी कुशल श्रमिकों को एच‑1बी वीज़ा के तहत नियुक्त किया है। यह जाल न केवल अमेरिकी नागरिकों के नौकरी के अवसरों को घटाता है, बल्कि वीज़ा प्रणाली की विश्वसनीयता को भी धूमिल करता है। जाँच के प्रारंभिक चरण में संस्थागत दस्तावेज़, कंपनी की भर्ती प्रक्रियाएँ और कर्मचारियों के वेतन विवरणों की सूक्ष्म जाँच की जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, कोग्निज़ेंट के कुछ परियोजनाओं में कर्मचारियों को वास्तविक वेतन के बजाय प्रदत्त वेतन से घटाकर बताया गया, जिससे वीज़ा आवेदन में ढाल बनाने में मदद मिली। इसके अलावा, कई केसों में कंपनियों ने ‘रिटेनर' और ‘कंसल्टेंट' जैसी अस्पष्ट श्रेणियों में नौकरियों को वर्गीकृत कर, आवश्यक कुशलता मानकों को कम करके वीज़ा प्राप्त करने की कोशिश की। इन आरोपों को लेकर अमेरिकी गृह मंत्रालय और श्रम विभाग ने आपराधिक अन्वेषकों को विशेष अधिकार दिए हैं, जिससे वे डिजिटल रिकॉर्ड, ई‑मेल और बैंक ट्रांज़ैक्शन की गहराई से जाँच कर सकें। यह बड़ा केस कई अमेरिकी राजनेताओं ने भी सार्वजनिक तौर पर उजागर किया है। पूर्व प्रेस सचिव ने कहा कि "अमेरिकी नौकरियों को सुरक्षित रखने के लिए हमें कड़ी कार्रवाई करनी होगी" और राष्ट्रपति के आर्थिक सलाहकार ने इस धारा पर विशेष ध्यान देने की बात दोहराई। इस ओर कई संघीय एजेंसियों ने संयुक्त प्रयास किया है, जिसमें डिपार्टमेंट ऑफ़ लेबर, इमिग्रेशन एंड कस्टमर सर्विसेज (ICE) और फेडरल इन्क्वायरी ब्यूरो (FBI) शामिल हैं। उन्होंने कहा कि यदि इन धोखाधड़ी गतिविधियों को साबित किया जाता है तो जाँच में शामिल कंपनियों के खिलाफ भारी जुर्माना, वीज़ा रद्दीकरण और यहाँ तक कि प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। कर्मचारियों और उद्योग विश्लेषकों की राय में यह जांच पूरी उद्योग के लिए एक चेतावनी है। यदि कंपनियों ने वास्तव में इस प्रकार की असमान प्रक्रियाओं को अपनाया है, तो उन्हें न केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा संबंधी भी बड़ी हानि का सामना करना पड़ेगा। दूसरी ओर, कानूनी तौर पर सत्यनिष्ठा दिखाने वाली कंपनियों को इस कदम से एक व्यापक भरोसा मिलेगा, जिससे वे बेहतर प्रतिभा को आकर्षित कर सकें। अंततः, इस जाँच का मुख्य लक्ष्य अमेरिकी औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को सुदृढ़ बनाना और विदेशी श्रमिकों के अभिगमन को उचित तथा पारदर्शी बनाना है। निष्कर्षतः, एच‑1बी व PERM वीज़ा धोखाधड़ी पर चल रही अमेरिकी जाँच केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि अमेरिकी श्रम बाजार में fairness और पारदर्शिता को स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कोग्निज़ेंट जैसी बड़ी कंपनियों का इस जाँच में शामिल होना इस बात का संकेत देता है कि नियामक संस्थाएँ अब गंभीरता से इस मुद्दे को देख रही हैं। आगे यह देखना होगा कि जाँच के परिणामों से कौन सी कंपनियों को दंडित किया जाता है और किस प्रकार नई नीतियाँ बनाकर वीज़ा प्रणाली को फिर से विश्वसनीय बनाया जाएगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 09 Jul 2026