अमेरिका के सीनेटर जे.डी. वांस ने हालिया एक साक्षात्कार में इज़राइल को "अमेरिका का केवल मित्र" कहकर विवाद उत्पन्न किया, जिससे इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नताल्याहू ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। वांस ने यह टिप्पणी तब की जब वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के इज़राइल के प्रति समर्थन पर चर्चा कर रहे थे, और उन्होंने कहा कि ट्रम्प ही इज़राइल के सबसे भरोसेमंद सहयोगी हैं। इस बयान ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों पर सवाल उठाने वाले आलोचकों को आश्चर्यचकित कर दिया, जबकि नताल्याहू ने इसे खारिज करके भारत के विशाल जनसमर्थन को अपने तर्क में जोड़ दिया। भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत-इज़राइल संबंधों ने पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से प्रगति की है। नताल्याहू ने इस अवसर पर कहा कि केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि भारत भी इज़राइल के "अधिकांश मित्र" हैं और इसके पीछे 1.4 अरब भारतीयों का समर्थन है। उन्होंने कहा कि भारत की रक्षा, कृषि, प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य क्षेत्रों में इज़राइल के साथ सहयोग दोनों देशों को लाभ पहुँचा रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने कई बिंदु उजागर किए, जैसे कि इज़राइल के उन्नत जल संरक्षण तकनीक को भारत में अपनाना और दोनों देशों के बीच सशस्त्र बलों के प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार। नताल्याहू ने यह भी रेखांकित किया कि इज़राइल को कई देशों की मित्रता मिलती है, न कि केवल एक ही देश की। उन्होंने कहा, "हमारे कई मित्र हैं, जिनमें भारत भी शामिल है," और यह बात कई अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर दोहराई। भारत की जनसंख्या विशाल होने के कारण उसका समर्थन इज़राइल के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना गया। इस प्रकार नताल्याहू ने वांस की टिप्पणी को वैज्ञानिक तथ्यों और जनसामान्य के समर्थन से खारिज कर, इज़राइल के बहु-आयामी कूटनीतिक संबंधों को उजागर किया। इस परिप्रेक्ष्य में, अमेरिकी मीडिया ने भी इस विवाद पर विस्तार से रिपोर्ट किया। कई टिप्पणीकारों ने कहा कि वांस की टिप्पणी संभवतः अमेरिकी भीतर की राजनीतिक आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति थी, जबकि नताल्याहू का उत्तर वैश्विक सहयोग की ओर इशारा करता है। भारतीय जनता के बीच इज़राइल के प्रति समर्थन का सर्वेक्षण इस बात का प्रमाण है कि दो देशों के बीच केवल द्विपक्षीय ही नहीं, बल्कि बहुपक्षीय सहयोग भी स्थापित हो रहा है। अंत में यह कहा जा सकता है कि जेडी वांस की "केवल मित्र" टिप्पणी ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक नई चर्चा को जन्म दिया, जिसमें भारत के बड़े जनसंख्या समर्थन को इज़राइल ने प्रमुख कारण बताया। इस संवाद ने न केवल अमेरिकी-इज़राइली संबंधों पर नया दृष्टिकोण प्रस्तुत किया, बल्कि भारत-इज़राइल सहयोग के महत्व को भी उजागर किया। भविष्य में यदि इस दिशा में और अधिक सहयोग बढ़ता रहा, तो दो देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और भी मजबूत होगी।