भारी धूमधाम से निर्मित राम जनमभू‑मि मंदिर के सामने अब एक औरभारी मुद्दा उभरा है। मिलियनर दानकर्ताओं की आशा के साथ एकत्र किए गए लाखों रुपये को लेकर कई आरोप लगे हैं, और उन पर हत्या‑जैसे कृत्यों का भी आरोप है। टाइम्स‑ऑफ़‑इंडिया और अन्य प्रमुख समाचार स्रोतों ने बताया कि राम मंदिर दानराशि के चोरी‑तेरे के मुख्य अभियुक्तों की जीवनशैली में पहले से ही बहुत बदलाव आया है। उन्हें बहुत बड़ी‑बड़ी हवेलियों, महँगी एसयूवी और डिज़ाइनर गाड़ियों की तस्वीरें सोशल‑मीडिया पर दिखाने के बाद सामुदायिक लोगों को विश्वास दिलाने का काम किया जाता है। एक विस्तृत जांच ने उजागर किया कि इन अभियुक्तों ने प्रतिदिन लगभग 6‑8 लाख रुपए का धंधा चलाया है, जिसे बहुत ही चालाकी से विभिन्न खातों में डालकर बैंकों के माध्यम से फ्रीज़ भी कर दिया गया। सिएट (विशेष जांच टीम) ने यह बताया कि इस धोखाधड़ी में कई बड़े‑बड़े डाक्टर, उद्योगपति और राजनीतिक प्रतिनिधि भी शामिल थे। उनके पास मांगी गई दानराशियों को अपनी निजी खातों में बटोरने के लिये विदेशी विनीमय और जटिल कंपनी ढांचों का सहारा लिया गया। इस दौरान इनके पास तय‑होने वाले अनुबंधों के आधार पर गवर्नमेंट, सामाजिक संस्थाओं और संघटनों को ठगी‐बाज़ी करनी पड़ी। यह कहा गया है कि एफआईआर में कई स्तरीय फंड ट्रांसफर और एंटी‑मनी‑लॉन्डरिंग उपायों को तोड़ा गया, जिससे प्रतिदिन 6‑8 लाख की सैकड़ें हर रजिस्टरों में बिखरती रहीं। जवाबदेही की पूछताछ में प्रवेश करने के बाद, विभिन्न राजनीतिक दलों ने इस मामले को भूली हुई सच्चाई बतलाने के लिये उपयोग किया। हिंदुस्तान में सबसे बड़ी रॉड मैपिंग कार्यकोश के मुखिया, त्रिपुरा नारायण वाइस, ने दल के अधिपति को सरसरी बयान देते हुए माना कि इस बड़े घोटाले से राज़ी बिन और अधिक बखेले होते हैं। यह भी उल्लेख किया गया कि व्हीपी (वैश्विक सहयोगी) प्लानिंग समिति ने दानराशियों के लेन‑देन की रोज़‑व्यवस्था का खुलासा किया है, जिससे एक जमीनी बुनियादी जाँच का कार्य छूटता है। नई दिल्ली की सुप्रीम कोर्ट ने इस पर जरूरतमंद लोगों के हित में जांच की मांग की है। आरजेडी के एक सांसद ने सीबीआई की व्यापक जांच का आह्वान करते हुए कहा कि इस तरह की दुविधा को उपेक्षित नहीं किया जा सकता। कई सामाजिक संगठनों ने कहा कि इस प्रकार की ग़लती से पूरे धार्मिक समुदाय की शुद्धता पर असर पड़ता है और बड़े धार्मिक कार्यों के सामने इस तरह की खराब नियोजन को नहीं बहाना चाहिए। अंत में कहा जा सकता है कि राम मंदिर के इस दान‑घोटाले ने समाज में एक गहरी छाया डाल दी है। महँगे घरों और पेशेवर कारों के पीछे छिपी हुई भ्रष्टाचार की सच्चाई को उजागर करने से, दानदाताओं के विश्वास को चोट पहुंची है। यह केस केवल धन के लूट का नहीं, बल्कि धार्मिक आस्था के व्यापार में भ्रष्टाचार के युग का संकेत देता है। अब जब जांच आगे बढ़ रही है, तो सार्वजनिक और न्यायिक संस्थानों को इस भ्रष्टाचार को सख्ती से रोके बिना नहीं रहना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के घोटालों को रोका जा सके।