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Breaking News: भारत का पासपोर्ट क्रमांक गिरा 125वें स्थान पर: वैश्विक पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में क्या रहा कारण?
🕒 1 hour ago

वर्तमान वैश्विक पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत का पासपोर्ट 125वें स्थान पर स्थापित हुआ है, जो पिछले साल के 124वें स्थान से एक क्रम में गिरावट दर्शाता है। इस परिणाम ने विदेश यात्रा और अंतरराष्ट्रीय मोबिलिटी के संदर्भ में भारत सरकार और आम जनता दोनों के बीच गहरी चर्चा को जन्म दिया है। पासपोर्ट इंडेक्स विभिन्न देशों के पासपोर्ट की शक्ति का मूल्यांकन करता है, जिसमें यह देखा जाता है कि एक पासपोर्ट धारणकर्ता बिना वीजा या न्यूनतम वीजा प्रक्रिया में कितने देशों में प्रवेश कर सकता है। भारत का पासपोर्ट अब केवल 58 देशों में वीजा‑फ्री या वीजा‑ऑन‑एराइवल सुविधाओं के साथ प्रवेश की अनुमति देता है, जो कई विकसित राष्ट्रों की तुलना में काफी कम है। इस गिरावट के मुख्य कारणों में यूरोप के शीर्ष दस देशों का लगातार बढ़ता प्रभाव प्रमुख है। इंडेक्स के अनुसार, यूरोपीय Union के अधिकांश सदस्य राष्ट्र, जैसे जर्मनी, फ़िनलैंड, आयरलैंड और नॉर्वे, पासपोर्ट शक्ति में अग्रणी हैं। इसके अतिरिक्त, कई एशियाई और अफ्रीकी देशों ने भी वीजा नीतियों में सहजता लाई है, जिससे भारत की तुलना में उनका रैंकिंग बेहतर रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पासपोर्ट की शक्ति में सुधार के लिए द्विपक्षीय वार्ता, वीजा सुविधा समझौतों को विस्तारित करना और प्रवास नीतियों में पारदर्शिता बढ़ाना आवश्यक होगा। आर्थिक और सामाजिक दृष्टिकोण से इस गिरावट के असर स्पष्ट हैं। व्यापारियों, छात्रों और पर्यटकों को अब अधिक यात्रा प्रतिबंध और वीजा प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और शैक्षणिक सहयोग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही, यह स्थिति विदेश में कार्य करने वाले भारतीय पेशेवरों के लिए भी अतिरिक्त बाधा बन सकती है, जिससे उनकी कामकाजी गतिशीलता सीमित हो सकती है। सरकार ने इस दिशा में कई पहलें शुरू की हैं, जैसे ई-वीज़ा प्रणाली को सुदृढ़ करना, द्विपक्षीय वीज़ा समझौतों को पुनः देखना और पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में डिजिटल सुरक्षा को बढ़ाना। भविष्य में भारत को पासपोर्ट रैंकिंग में सुधार प्राप्त करने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाना होगा। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को अपने आर्थिक महत्व को उजागर करते हुए वीज़ा‑मुक्त यात्रा के लिए नई समझौते करने चाहिए। साथ ही, आंतरिक प्रशासनिक सुधार, जैसे पासपोर्ट आवेदन में तेज़ी और धोखाधड़ी-रहित तकनीक का उपयोग, भी रैंकिंग को ऊपर ले जाने में मदद कर सकता है। यदि इन कदमों को उचित समय पर लागू किया गया तो अगले पासपोर्ट इंडेक्स में भारत को 100वें श्रेणी में प्रवेश करने की संभावना भी पूरी तरह से संभव है। निष्कर्षतः, भारत का पासपोर्ट 125वें स्थान पर गिरना केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा, व्यापार और शिक्षा के क्षेत्रों में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति की दिशा में एक चेतावनी संकेत है। इसे सुधारने के लिए सरकार, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज को मिलकर ठोस नीतियों एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना होगा, तभी भारत के पासपोर्ट को फिर से विश्वसनीय और मजबूत माना जा सकेगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 05 Jul 2026