तेहरान के शाही महल में आयतुल्लाह अली खमेनी के शरीर को रख कर रखी गई अंतिम संस्कार की तैयारी ने पूरे इरान को शोक में डुबो दिया है। 24 साल तक इस्लामी गणराज्य के सर्वोच्च नेता रहे खमेनी की मौत के बाद, देश के विभिन्न हिस्सों में एक हफ्ते तक चलने वाली सार्वजनिक शोक-अभ्यास शुरू हो गई है। इस दौरान उनके शव को स्तरित कक्ष में रखा गया है, जहाँ श्रद्धालु और सरकारी अधिकारी लगातार दर्शन कर रहे हैं। राजधानी में स्थापित विशाल तंबू के नीचे हजारों लोग कतारों में लगाकर खमेनी को अंतिम विदाई देने के लिए आए हैं, जबकि कई विदेशी प्रतिनिधि, नौजवान राजनयिक और विश्व स्तर के नेता भी इस शोकसभा में भाग ले रहे हैं। आधिकारिक चैनलों ने बताया है कि खमेनी के शव को एक विशेष कक्ष में रखा गया है जहाँ श्रद्धांजलि अर्पित करने वाले नागरिकों को पंजीकरण के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी गई है। प्रत्येक व्यक्ति को लगभग पांच मिनट की अनुमति दी जा रही है, जिसके बाद अगली पंक्ति में इंतजार करने वाले लोगों को प्रवेश मिलता है। इस प्रक्रिया में सुरक्षा बलों ने कड़ी व्यवस्था स्थापित की है, जिससे भीड़ नियंत्रण में रहे। वहीं, इरानी परिदृश्य में अभूतपूर्व रूप से बड़ी भीड़ जुटी है; कई शहरों से आए भक्तों ने अपने-अपने शहरों में जमावड़ा बना दिया है और विशेष रूप से शहेद झाद, मशहूर शाही राजमार्ग पर ट्रैफिक जाम और रुकावटें देखी जा रही हैं। शोक समारोह के दौरान कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दूतावासों के प्रतिनिधियों ने भी खमेनी को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रवास किया। भारत, ब्रिटेन, और चीन के राजनयिक प्रतिनिधियों के साथ ही कई एशियाई और मध्य पूर्वी देशों के उच्चायुक्त भी उपस्थित रहे। प्रतिनिधियों ने मुस्लिम धर्म में शोक-संस्कृति के नियमों को मानते हुए, खमेनी को शहादत का दर्जा देते हुए सम्मान व्यक्त किया। विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि इस शोक-अभियान में इरान के कुछ प्रमुख नेताओं और सरकारी अधिकारियों का भी भारी उपस्थिति रही है। राष्ट्रपति और प्रमुख मंत्रियों ने सार्वजनिक मंच पर खमेनी के जीवन और उनके योगदान की प्रशंसा की, साथ ही उनके बाद आए अस्थिर राजनीतिक माहौल में राष्ट्रीय एकता को बड़ावा देने का आह्वान किया। इस शोक-अभियान को देखते हुए कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय एकता और शांति का संदेश दिया, जबकि कुछ विरोधी समूहों ने इस शोक को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करने की निंदा की। अंत में कहा जा सकता है कि आयतुल्लाह खमेनी का अंत्यसंस्कार इरान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जहाँ शोक और श्रद्धा के साथ-साथ राजनीतिक और सामाजिक विचारों की नई लहरें भी उभर रही हैं। इस एक हफ्ते के शोक-महोत्सव के दौरान, नागरिकों के बीच एकजुटता की भावना स्पष्ट रूप से झलक रही है, जबकि सरकार भी इस अवसर का उपयोग राष्ट्रीय स्थिरता और एकजुटता को पुनः स्थापित करने के लिये कर रही है। शोक नहीं केवल व्यक्तिगत भावनाओं का अभिव्यक्ति है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय पहचान और भविष्य की दिशा को भी प्रतिबिंबित करता है।