सॉलिसिटर जनरल ने मेघालय में जमानत की सुनवाई के दौरान एक चौंकाने वाली बात कहीं कि केटन अग्रवाल की मौत जैसी घटनाएँ बढ़ रही हैं। यह बयान उस समय आया जब हाई कोर्ट में एक अभियुक्त को जमानत दिलाने की याचिका पर बहस चल रही थी। जनरल ने इसे सिर्फ एक व्यक्तिगत दया का मामला नहीं माना, बल्कि इसको न्यायिक प्रक्रिया में एक गंभीर चेतावनी के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि ऐसी असाधारण घटनाएँ समाज में कानून के प्रति विश्वास को हिला सकती हैं और अदालतों को अत्यधिक सतर्क रहने की जरूरत है। केटन अग्रवाल की मृत्यु एक बड़े व्यवसायी की राजकीय घोटाले से जुड़ी थी, जिसमें कई राजनीतिक और आर्थिक दबावों को शामिल किया गया था। सॉलिसिटर जनरल ने इस मामले को उद्धृत करते हुए कहा कि जब तक न्यायालय ऐसे मामलों में सटीक तथ्यों और साक्ष्यों की गहन जाँच नहीं करता, तब तक जमानत के अनुरोध को स्वीकृति देना जोखिम भरा हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कथन किसी विशेष केस की ओर इशारा नहीं है, बल्कि इस बात के संकेत के रूप में है कि ऐसी घटनाएँ अब दुर्लभ नहीं रह गईं हैं। मेघालय के इस मामले में अभियुक्त को सार्वजनिक सुरक्षा और सामाजिक शांति को लक्षित करने वाले आरोपों का सामना करना पड़ रहा था। अदालत में सुनवाई के दौरान पक्षकारों ने विभिन्न साक्ष्य प्रस्तुत किए, पर सॉलिसिटर जनरल ने यह कहा कि जमानत की मंजूरी से पहले सभी पहलुओं का समुचित मूल्यांकन आवश्यक है। उन्होंने यह भी संकेत किया कि न्यायपालिका को भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए कड़े मानदंड स्थापित करने चाहिए, जिससे अपराधियों को अपने कार्यों के लिए तुरंत जवाबदेह ठहराया जा सके। अंत में न्यायालय ने सभी पक्षों की बातों को ध्यान में रखते हुए सावधानीपूर्वक निर्णय लिया। जमानत के आवेदन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया, और आगे की जांच के बाद ही अंतिम निर्णय दिया जाएगा। यह कदम न केवल न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता को दर्शाता है, बल्कि समाज में बढ़ती अविश्वास के बीच न्याय के लिए एक मजबूत संदेश भी देता है। सॉलिसिटर जनरल का यह भाषण इस बात की पुष्टि करता है कि न्यायाधीशों को भी अब असामान्य घटनाओं की बढ़ती आवृत्ति को समझते हुए अपने निर्णयों में अधिक सतर्कता बरतनी होगी।