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Breaking News: चीन की नई आर्थिक गलियारा योजना: भारत की सीमा पर बांग्लादेश‑म्यांमार का रास्ता
🕒 1 hour ago

चीन ने हाल ही में अपनी रणनीतिक आर्थिक धारा को एक नया आयाम देने का इरादा जाहिर किया है। पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश और म्यांमार को जोड़ते हुए एक नया आर्थिक गलियारा बनाने की संभावना उभरी है, जिसकी सीमा भारत के पूर्वी भाग के पास होगी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत के साथ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और दक्षिण‑पूर्व एशिया में अपना प्रभाव विस्तार करना है। चीन ने पहले ही चीन‑पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) के माध्यम से अपने शेष अधिस्वीकृत मार्ग को सफलतापूर्वक स्थापित कर लिया था, और अब वह इस मॉडल को बांग्लादेश और म्यांमार तक ले जाना चाहता है, ताकि भारत की प्रमुख आर्थिक जड़ें बाधित हों। बांग्लादेश और म्यांमार के साथ इस प्रोजेक्ट के प्रमुख पहलुओं में रोड, रेल आणि समुद्री रास्ते शामिल होंगे। चीन के कांगशा (गुंज़ौ) पर स्थित एकीकृत योजना निकाय ने कहा है कि यह गलियारा भारत के पूर्वी किनारे पर स्थित असम और पश्चिम बंगाल के निकट स्थित सीमावर्ती क्षेत्रों को पार करते हुए बांग्लादेश के खलासिडवापर तक पहुँचेगा, फिर म्यांमार के रांगुनी या शंघाई तक विस्तारित होगा। इस मार्ग के माध्यम से चीन को समुद्री और स्थल परिवहन में दुगुना लाभ मिलेगा, साथ ही बांग्लादेश तथा म्यांमार को बड़े निवेश, बुनियादी ढांचे का विकास और ऊर्जा सुरक्षा का भरोसा भी मिलेगा। भारत के लिए इस योजना का प्रभाव दोहरी तरह से देखा जा रहा है। एक ओर, चीन की इस नई आर्थिक चौड़ाई से भारत की पूर्वी सीमा पर सुरक्षा चुनौतियाँ तीव्र होंगी, क्योंकि इससे चीन का रणनीतिक पहुँच बढ़ेगा और भारत के प्रमुख पोर्टों जैसे कोलकाता, हाजीपुर और पुरी पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। दूसरी ओर, यह भारत को अपने स्वयं के आर्थिक विकास रोडमैप को पुनः संवारने के लिए प्रेरित कर सकता है। दिल्ली अब अपने बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने, नई रेल तथा जलमार्ग परियोजनाओं को गति देने और पड़ोसी राष्ट्रों के साथ आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए Monroe Doctrine‑सदृश नीति पर विचार कर रहा है। अंत में कहा जा सकता है कि चीन का यह नया आर्थिक गलियारा योजना दक्षिण‑पूर्व एशिया में शक्ति संतुलन को फिर से परिभाषित कर सकती है। यदि इसे सफलतापूर्वक लागू किया गया, तो यह न केवल चीन को विश्व आर्थिक मंच पर मजबूत बनाता है, बल्कि भारत के लिए एक बड़ी चुनौति भी बनती है। इसके जवाब में भारत को अपनी नीति, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा उपायों को अद्यतन करने की आवश्यकता होगी, ताकि वह इस नई प्रतिस्पर्धा में अपना हक सुरक्षित रख सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 03 Jul 2026