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Breaking News: चम्पत राय ने खुलासा किया: राम मंदिर दान की चोरी में छिपी कैमरों का कारनाम
🕒 1 hour ago

जब से राम मंदिर का कार्य पूर्णता की ओर बढ़ रहा है, तब से निवेशकों और दानदाताओं की आशाएँ भी उसी के साथ ऊँची उड़ान भर रही हैं। परन्तु हाल ही में सामने आई एक नई विवादास्पद खबर ने इस पवित्र कार्य को धुंध में घेर दिया है। लोकप्रिय संस्थान राम मंदिर यत्रा के पूर्व प्रमुख चम्पत राय ने खुद बयां किया कि उनका निजी रूप से स्थापित छिपा कैमरा, मंदिर दान में होने वाली अनधिकृत चोरी को उजागर करने के लिए स्थापित किया गया था। उन्होंने कहा कि इस कैमरे से प्राप्त वीडियो में दानराशियों के असामान्य हस्तांतरण और कई वरिष्ठ कर्मचारियों की हिस्सेदारी स्पष्ट हो गई। इस खुलासे के बाद, दान के अभिलेखों का विस्तृत जांच शुरू हो गया है, जिसमें लाखों रुपये के नकदी लेनदेन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, चम्पत राय ने 2023 के मध्य में मंदिर के मुख्यालय के भंडारण कक्ष में एक छोटा, उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाला छिपा कैमरा लगाया था। उनका उद्देश्य था कि किसी भी अनाधिकृत लेनदेन को रिकॉर्ड किया जाए, जिससे भविष्य में दान की पारदर्शिता बनाए रखी जा सके। लेकिन हाल ही में उन्होंने स्वीकार किया कि इस कैमरे ने दिखाया कि एक सहायक—जिसे उन्होंने टिन्नू यादव बताया—ने कई दानराशियों को अपने निजी खाते में स्थानांतरित किया था। टिन्नू के हाथों में लगभग एक लाख रुपये से लेकर 20 लाख रुपये तक की राशि पाई गई, जो मूल रूप से मंदिर के निर्माण कार्य के लिए दी गई थी। इस अनियमितता पर विपक्ष ने भी कड़ा आयाम किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेंनुगोपाल ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि राम मंदिर दान चोरी के मामले में स्वतंत्र और सुप्रीम कोर्ट निगरानी वाली जांच की जानी चाहिए। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के आर्थिक अनियमितताओं से न केवल धर्मस्थल की प्रतिष्ठा पर असर पड़ेगा, बल्कि दानदाताओं का विश्वास भी भ्रमित हो जाएगा। कई समाचार पोर्टलों ने इस मुद्दे को गहराई से उठाया, जहाँ विभिन्न स्रोतों ने बताया कि चोरी की प्रक्रिया में कई मध्यस्थों का सहयोग था, जिससे धन का प्रवाह जटिल रूप से छिपा रहा। अब इस मामले की जांच के कई पहलू स्पष्ट होने की कगार पर हैं। न्यायालय ने इस मुद्दे पर सुनवाई की तारीख तय की है, और विशेष जांच एजेंसियों को दस्तावेज़ी साक्ष्य, कैमरा फुटेज और बैंक लेनदेन की विस्तृत जाँच करने का काम सौंपा गया है। यदि इस जांच में टिन्नू यादव और अन्य जुड़े हुए कर्मचारियों के खिलाफ सजा सुनायी जाती है, तो यह न केवल मंदिर की आर्थिक पारदर्शिता को पुनर्स्थापित करेगा, बल्कि दानदाताओं के भरोसे को भी पुनः स्थापित करेगा। समाप्ति में कहा जा सकता है कि राम मंदिर दान चोरी का मामला धर्म, राजनीति और प्रशासन के बीच जटिल संबंधों को उजागर करता है। चम्पत राय का यह कदम, चाहे वह सही हो या नहीं, इस बात की ओर इशारा करता है कि पारदर्शिता की कमी से बड़े धार्मिक प्रकल्पों में भी भ्रष्टाचार की सम्भावना बनी रहती है। जनता को इस मामले के निष्कर्ष का इंतजार रहेगा, और आशा है कि न्याय की तेज़ी से यह दुराचार समाप्त हो कर, राम मंदिर निर्माण कार्य को एक नई स्वच्छ छवि के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 02 Jul 2026