कर्नाटक सरकार ने हाल ही में अपने नागरिकों के लिये स्थायी निवासी प्रमाणपत्र (आरसी) जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाने का घोषणा किया, जिससे चयनित वार्षिक जनगणना (SIR) को सुगम बनाया जा सके। मुख्य मंत्री डी.के. शिवकुमार ने यह बात राज्य सभा में कही, कि अब प्रत्येक नागरिक को एक बार स्थायी रूप से आरसी जारी किया जाएगा, जिससे भविष्य में किसी भी सरकारी योजना का लाभ उठाते समय आवासीय प्रमाणपत्र की झंझट नहीं होगी। यह कदम राज्य में रहन-सहन को स्थिर करने और सामाजिक‑आर्थिक लाभों के सहज वितरण को सुनिश्चित करने के लिये उठाया गया है। इस नई नीति के तहत सभी निवासियों को एक ही बार में स्थायी आरसी प्राप्त करने का अधिकार मिलेगा, जिससे पुनः‑पुनः दस्तावेज़ जमा करने की प्रक्रिया समाप्त हो जाएगी। इसके अलावा, सरकार ने घर‑घर जाकर मतदान अभिलेख तैयार करने की प्रक्रिया को भी तेज किया है, जहाँ मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने आधिकारिक आवास से ही जनगणना कार्य प्रारम्भ किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हर घर की जनसांख्यिकीय जानकारी को सटीक रूप से दर्ज करना और आगामी चुनावी प्रक्रियाओं में शुद्ध तालिका बनाना है। इससे मतदाताओं को अपने मतदान अधिकार का प्रयोग करने में आसानी होगी और राजनैतिक दलों को भी वास्तविक आंकड़ों के आधार पर रणनीति बनाने का अवसर मिलेगा। मुख्य मंत्री ने कहा कि स्थायी निवासी प्रमाणपत्र जारी करने के बाद, नागरिकों को सरकारी योजनाओं, बंधक ऋण, शिक्षा तथा स्वास्थ्य लाभ के लिये अनावश्यक दस्तावेज़ीकरण से मुक्त किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह पहल कर्नाटक के विकास को प्रोत्साहित करने वाले विभिन्न सामाजिक योजनाओं में पारदर्शिता और दक्षता लाएगी। सरकार ने इस अभिक्रम को लागू करने के लिये तकनीकी सहयोग भी प्रदान किया है, जिससे डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा मिलेगा और ऑनलाइन प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज़ और सुरक्षित होगी। अंत में कहा जाए तो यह नया कदम कर्नाटक को सामाजिक न्याय और डिजिटल साक्षरता के क्षेत्र में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित कर सकता है। स्थायी निवासी प्रमाणपत्र के माध्यम से न केवल नागरिकों का जीवन आसान होगा, बल्कि प्रशासनिक बोझ भी कम होगा। भविष्य में इस प्रकार की पहलें अन्य राज्यों में भी लागू हो सकती हैं, जिससे देश भर में समानता और सुविधाजनक शासन प्रणाली के लिये एक प्रेरणादायक उदाहरण स्थापित होगा।