भारतीय वाणिज्य मंत्री एवं अमेरिकी राजनयिक सर्गियो गोर ने हाल ही में कहा कि भारत‑अमेरिका के बीच चल रहे व्यापार समझौते का अंतिम चरण अब सिर्फ़ एक‑से दो प्रतिशत के अंतराल में ही समाप्त हो रहा है। यह टिप्पणी उन्होंने न्यू यॉर्क में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन में की, जहाँ दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने व्यापार को बढ़ाने के लिए नए उपायों पर चर्चा की। गोर ने यह बताया कि अब तक दोनों पक्षों ने वस्तु‑सेवा, निवेश, बौद्धिक सम्पदा संरक्षण व डिजिटल व्यापार के क्षेत्रों में कई समझौते किए हैं, और अब बाचीत का फोकस शेष छोटे‑छोटे मुद्दों पर केंद्रित है। इस दौर में केवल कस्टम ड्यूटी, कृषि निर्यात, और छोटे‑मध्यम उद्योगों की सहायता जैसी बारीकियों पर ही बात बाकी है, जिसे जल्द ही अंतिम रूप दिया जाएगा। अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार की मात्रा पिछले पाँच वर्षों में लगातार बढ़ती आई है, और इस समझौते के पूर्ण होने पर दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और भी गहराने की उम्मीद है। गोर ने कहा कि इस समझौते से अमेरिकी कंपनियों को भारतीय बाजार में आसानी से प्रवेश मिलेगा, जबकि भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी नागरिकों के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी बने रहने का मौका मिलेगा। साथ ही, यह समझौता एशिया‑प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका की आर्थिक पकड़ को मजबूत करेगा, जबकि भारत को अपने निर्यात बास्केट को विविधता प्रदान करने में मदद करेगा। वृहद आर्थिक लाभों के अलावा, इस समझौते के माध्यम से दोनों देश सुरक्षा व रणनीतिक सहयोग को भी सुदृढ़ करने की कोशिश करेंगे। अमेरिकी विदेश मंत्री ने पहले ही कहा था कि भारत के साथ आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने से इंडो‑पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित होगी। गोर ने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक सहयोग और रणनीतिक सहयोग आपस में अविभाज्य हैं, और इस समझौते से दोनों देशों के बीच के सामरिक संवाद को भी नई दिशा मिलेगी। अंत में कहा जा सकता है कि भारत‑अमेरिका व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में है, और अगले कुछ हफ्तों में मिलने वाली छोटी‑छोटी शर्तें दोनों पक्षों के बीच विभिन्न उद्योगों को लाभ पहुंचाने की संभावना रखती हैं। इस समझौते की पूर्णता से न केवल व्यापारिक आँकड़े सुधरेंगे, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक मित्रता को भी नई ऊँचाई मिलेगी। भविष्य में इस बात का ध्यान रखना होगा कि छोटे‑छोटे विवादों को शीघ्र हल किया जाए, ताकि दोनो देशों का सहयोग निरंतर और स्थायी रूप से आगे बढ़ सके।