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Breaking News: मुहम्मद माह के जुलूस में रैट पॉइज़ की साज़िश: पुलिस ने पकड़ा वह व्यक्ति जो बाँट रहा था विषैले गोलियां
🕒 1 hour ago

मुहम्मद माह के पवित्र जुलूस के दौरान अचानक उठी चिंता की लहर के बाद, मुंबई पुलिस ने एक गुप्त ऑपरेशंस के तहत उस व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया जो बड़ी संख्या में रैट पॉइज़ अर्थात् चूहा ज़हर की गोलियां वितरित कर रहा था। यह घटना तब सामने आई जब पुलिस ने जुलूस के मार्ग के आस-पास अनियमित गतिविधियों की निगरानी की और अचानक एक अजनबी को बड़ी मात्रा में पिल्स बाँटते देखा। जांच में सामने आया कि यह गोलियां विषैली थीं और उनका उद्देश्य भीड़ में धक्का मार कर बड़े पैमाने पर हत्याकांड करना था। इस साजिश के पीछे मुख्य आरोपी का इरादा था "दुनिया से बदला" लेना क्योंकि उसकी पत्नी ने उसे छोड़ दिया था, जैसा कि आरोपी ने अपने बयान में कहा। पोलिस ने बताया कि इस व्यक्ति ने 50 किलोग्राम रैट पॉइज़ और 30,000 से अधिक विषैले गोलियां घर-घर तक पहुंचाने की योजना बनाई थी। उसके पास वह गोलियां छोटे छोटे पाउचों में भर कर जुलूस के प्रतिभागियों को बाँट रहा था। पुलिस ने इस दौरान कई गवाहों और जुलूस के प्रतिभागियों से भी बयान लिया, जिनमें से कई ने बताया कि उन्होंने अनजान हाथ से दी गई गोलियां खाने से बचने की कोशिश की। इस घटनाक्रम ने शहर में सुरक्षा को लेकर भय और चिंता को बढ़ा दिया, जबकि मुहम्मद माह के जुलूस को अक्सर शांति और भाईचारे के प्रतीक के रूप में माना जाता है। जांच के दौरान पता चला कि आरोपी ने अपने कार्यों को एक "उच्चतम धर्मिक कर्तव्य" का ढाँचा दिया था, और सोशल मीडिया पर अपने आप को नायक बनाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, पुलिस ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के दुष्प्रचार और हिंसक कार्यों को सख़्ती से रोकना आवश्यक है। आरोपी को अब अदालत में पेश किया जाएगा, जहाँ उसे कई गंभीर अपराधों के आरोपों का सामना करना पड़ेगा, जिसमें सूचनात्मक हत्याकांड और सार्वजनिक व्यवस्था को बिखराने की कोशिश शामिल है। इस घटना ने शहर के प्रशासन को भी घबराहट में डाल दिया। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि वे भविष्य में ऐसे धार्मिक महोत्सवों के दौरान कड़ी सुरक्षा इंतजाम करेंगे, तथा नागरिकों को सतर्क रहने और अनजाने में किसी भी अज्ञात वस्तु को न लेने की सलाह दी। साथ ही, पुलिस ने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी भी तरह का विष या संदिग्ध पदार्थ देखे तो तुरंत सूचना दे, ताकि ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। अंत में यह कहा जा सकता है कि मुहम्मद माह का जुलूस अब भी श्रद्धालुओं का प्रमुख धार्मिक आयोज़न है, परंतु इस प्रकार की साज़िशें समाज में गहरी धीरजता और अंधविश्वास को दर्शाती हैं। सुरक्षा बलों की सतर्कता, जनता की जागरूकता और कड़े क़ानूनी कदमों से ही ऐसे खतरनाक षड्यंत्र को रोका जा सकेगा और धार्मिक समारोहों को शांति व एकता के साथ मनाया जा सकेगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 29 Jun 2026