अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में किए गए स्मृति पत्र (MoU) को कई बार "उष्णकटिबंधीय समझौता" कहा गया, पर इसका सबसे विवादास्पद भाग है अनुच्छेद 5। यह अनुच्छेद दोनों देशों को सैन्य सक्रियता के खिलाफ "एक-दूसरे की सुरक्षा" का भरोसा देता है, जिससे एक पक्ष को दुश्मनी को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। मूल रूप से यह एक लचीलापन प्रदान करने वाला क्लॉज़ है, जिससे किसी भी पक्ष को कठिन परिस्थितियों में अति-शक्ति के प्रयोग की अनुमति मिलती है, बशर्ते वह दूसरों की सुरक्षा का उल्लंघन न करे। लेकिन इस भाषा की अस्पष्टता ने तटस्थ रक्षक की भूमिका में उलझन पैदा कर दी है, जिससे दोनों देशों के मिलनसार पक्ष के बीच मतभेद घटते नहीं दिखे। संदर्भ में देखे जाएं तो अनुच्छेद 5 ने कई बार मध्यस्थ‑पुरुषार्थी संघर्षों को भड़का दिया है। जलसंधि क्षेत्रों में अमेरिकी जहाज़ों पर ईरानी रॉकेटों की लगातार चाल भले ही शैक्षणिक तौर पर शत्रुता को दर्शाती हो, पर यह क्लॉज़ इसे "स्वरक्षा" के रूप में पेश करता है। इस दुविधा को समझाने के लिए विशेषज्ञ कहते हैं कि शर्तें पर्याप्त रूप से परिभाषित न होने के कारण, दोनों पक्ष अक्सर अपने-अपने रणनीतिक हितों को इस अनुच्छेद के पहरे में छुपाते हैं। परिणामस्वरूप, Gulf में कई बार घातक मुठभेड़ों की श्रृंखला देखी गई, जहाँ दोनों पक्ष दावा करते रहे कि वे अनुच्छेद 5 के तहत कार्रवाई कर रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि कोई वास्तविक "संरक्षण" हो रहा है या केवल प्रतिशोध। अंत में, अनुच्छेद 5 का वास्तविक उद्देश्य पारस्परिक भरोसे को बनाये रखना था, परन्तु अस्पष्ट शब्दावली ने इसे उल्टा प्रभाव डाल दिया। जब तक इस फ्रेमवर्क में स्पष्ट मानक और सीमा-रेखा नहीं लिखी जाएगी, तब तक इस अनुच्छेद का दुरुपयोग जारी रहेगा और शांति प्रयासों को बाधित करेगा। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय नीति निर्माताओं और दोनों देशों की सरकारों को इस क्लॉज़ को पुनः समीक्षा कर, स्पष्ट परिभाषाएँ जोड़नी चाहिए, ताकि "सुरक्षा" शब्द का दुरुपयोग न हो और भविष्य में संभावित संघर्षों को रोकने के लिए एक ठोस ढाँचा स्थापित हो सके।