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Breaking News: इंडियन ओशन को बनाना है अवसरों का महासागर: मोदी का सेशेल्स में ऐतिहासिक विज़न
🕒 1 hour ago

प्रथम अंश में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स की संसद में संबोधित करते हुए भारतीय समुद्र को "अवसरों का महासागर" बनाने की अपनी दूरदर्शी नीति को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। यह महत्त्वपूर्ण यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने के लिये नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा, व्यापार व पर्यावरण संरक्षण के लिये एक नया मंच स्थापित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। मोदी ने कहा कि भारतीय महासागर उन सभी देशों के लिये आर्थिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा और नौजवानी कौशल का अभिन्न आधार है, और इसे टिकाऊ एवं समावेशी बनाना हर राष्ट्र का सामूहिक कर्तव्य है। दूसरे भाग में, भारत और सेशेल्स ने कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करने के konkrete कदमों पर चर्चा की। दोनो देशों के बीच समुद्री विज्ञान, जलवायु परिवर्तन, मत्स्य पालन और टूरिज्म के क्षेत्र में नई परियोजनाएं शुरू करने की योजना बनी। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री को "ब्लू होराइजन के अभिभावक" का सम्मानजनक उपाधि प्रदान की गई, जो समुद्री संरक्षण और जलवायु न्याय के प्रति भारत के योगदान को मान्यता देती है। दोनों राष्ट्रों ने समुद्री सुरक्षा के लिये संयुक्त अभ्यास और सूचना साझेदारी करने का भी आश्वासन जताया, जिससे समुद्री डकैती और गैर-राज्य एक्टर्स की गतिविधियों पर कड़ा मुकाबला किया जा सके। तीसरे अनुच्छेद में, समुद्री कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिये अवसंरचना परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। भारत ने सेशेल्स को आधुनिक पोर्ट सुविधाओं, जलवायु-प्रतिरोधी ऊर्जा समाधान और डिजिटल कनेक्टिविटी प्रदान करने का प्रस्ताव रखा। यह पहल द्वीप राष्ट्रों को वैश्विक आर्थिक धारा में अधिक सम्मिलित करने के लिये एक निर्णायक कदम है, जिससे स्थानीय उद्यमी और युवा वर्ग को नई नौकरियों और प्रशिक्षण के अवसर उपलब्ध हो सकते हैं। साथ ही, संयुक्त समुद्री अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की योजना पर भी सहमति बनी, जिससे दोनों देशों के वैज्ञानिकों को मौसमी बदलाव, समुद्री जैव विविधता और जलवायु विज्ञान के बारे में गहन अध्ययन करने का मंच मिलेगा। अंतिम पैरा में, प्रधानमंत्री ने जलवायु कार्रवाई में न्यायसंगतता की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि छोटे द्वीपीय राष्ट्रों के लिये जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अधिक गंभीर होते हैं, और इसलिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के तहत हर देश को समान रूप से योगदान देना चाहिए। इस संदर्भ में, भारत ने अपने नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य और ग्रीन फाइनेंस के माध्यम से छोटे देशों को समर्थन देने का वचन दिया। इस प्रकार, सेशेल्स यात्रा न केवल भारत-सेशेल्स संबंधों को नई ऊँचाइयों पर ले गई, बल्कि व्यापक भारतीय संपर्क क्षेत्र में समुद्री सहयोग और सतत विकास के लिये एक प्रेरक मॉडल प्रस्तुत किया। भविष्य में इस दृष्टिकोण को कार्यान्वित करने के लिये निरंतर संवाद, आर्थिक निवेश और तकनीकी साझेदारी की आवश्यकता होगी, जिससे भारतीय महासागर वास्तव में अवसरों का महासागर बन सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 28 Jun 2026