कैलाश-मानसरोवर तीर्थयात्रा भारत, चीन और नेपाल के बीच चलने वाली एक पवित्र परम्परा है, परन्तु इस साल प्रारम्भिक प्रारूप में ही कई यात्रियों को अनपेक्षित कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विदेश मंत्रालय ने यात्रियों को चेतावनी जारी कर, सभी निजी यात्रा एजेंटों को सूचित किया है कि वे चीन के आवश्यक पारगमन परमिट की पुष्टि किये बिना कोई भी यात्रा व्यवस्थित न करें। इस दिशा-निर्देश के बाद भी, कई भारतीय यात्रियों को नेपाल के काठमांडू हवाई अड्डे पर अनिश्चितकालीन ठहराव का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि उनके पास चीन के लिए आवश्यक वैध प्रवास परमिट नहीं है। प्रधानमंत्री के सहायक के रूप में काम करने वाले कई राष्ट्रीय यात्रा कंपनियों ने इस यात्रा के लिए विदेशी परमिट की प्रक्रिया को सरल बताया था, परन्तु वास्तविकता में कई एजेंटों ने आवश्यक कागजात के बिना यात्रियों को ट्रेन, बस या हवाई मार्ग से नेपाल ले जाकर कैलाश-मानसरोवर की ओर आगे बढ़ने की योजना बनाई। नेपाल में पहुंचते ही यात्रियों को पता चला कि चीन की प्रवास अनुमति के बिना उन्हें तीर्थस्थल तक पहुंचना अवरुद्ध है। इस कारण कई भारतीय यात्रियों को काठमांडू में ही रहना पड़ा, जहाँ उन्हें विशेष हलाल होटलों में ठहराया गया, परन्तु निरंतर देर होने के कारण उनके टिकट रद्द होते जा रहे हैं और खर्च बढ़ रहा है। विदेश मंत्रालय ने इस स्थिति को लेकर एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी की है, जिसमें कहा गया है कि "सबसे पहले यात्रियों को अपने टूर ऑपरेटर की विश्वसनीयता की जांच करनी चाहिए और चीन के लिए वैध यात्रा परमिट की व्यवस्था करने से पहले किसी भी यात्रा में आगे नहीं बढ़ना चाहिए"। साथ ही, मंत्रालय ने इस बात पर बल दिया है कि विदेश में यात्रा योजना बनाते समय आधिकारिक स्रोतों, जैसे भारतीय दूतावास, वाणिज्य दूतावास और विश्वसनीय यात्रा परामर्शदाता, से संपर्क करके सभी आवश्यक दस्तावेज़ों की पुष्टि करनी चाहिए। यह सलाह केवल कैलाश-मानसरोवर यात्रा के लिए ही नहीं, बल्कि सभी सीमा पार यात्राओं के लिए आवश्यक है। इस समस्या का समाधान खोजने के लिए कई यात्रियों ने अपने वाणिज्य दूतावास से संपर्क किया है। दूतावास ने बताया कि वे यथाशीघ्र आवश्यक परमिट जारी करने के लिए संबंधित चिनी अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहे हैं, परन्तु प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है। इसलिए, यात्रियों को धैर्य रखने और आवश्यक कागजी कार्रवाई को पूरा करने के लिए समय देना आवश्यक है। अंतर्राष्ट्रीय यात्रा एजेंसियों ने भी अपील की है कि वे अपने क्लाइंट्स को यात्रा से पहले सभी आवश्यक दस्तावेज़ों की पुष्टि कर सुनिश्चित करें कि भविष्य में ऐसी समस्याएँ न उत्पन्न हों। अंत में कहा जा सकता है कि कैलाश-मानसरोवर यात्रा का उद्देश्य शारीरिक और आध्यात्मिक शुद्धिकरण है, परन्तु उचित दस्तावेज़ों के अभाव में यह यात्रा एक कठिनाइयों से भरा सफर बन सकता है। विदेश मंत्रालय की चेतावनी को गंभीरता से लेते हुए, यात्रा योजना बनाने वाले प्रत्येक भारतीय यात्री को चाहिए कि वह सभी आवश्यक कागज, विशेषकर चीन के प्रवास परमिट, पहले से ही सुनिश्चित कर ले। इस प्रकार, आपत्ति रहित और सुगम यात्रा के लिए उचित तैयारी ही सफलता की कुंजी है।