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Breaking News: इज़राइल-लेबनान समझौता: नेतन्याहू ने कहा 'इतिहासिक', लेकिन Hezbollah ने किया तीखा जवाब
🕒 1 hour ago

पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच इज़राइल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ हुए समझौते को "इतिहासिक" कहा, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय में उत्सुकता और विवाद दोनों ही तेज़ी से बढ़े हैं। यह समझौता, जो दक्षिणी लेबनान की सीमा पर हिंसा को रोकने के उद्देश्य से किया गया, दोनों पक्षों के लिए कई रणनीतिक और राजनैतिक मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नेतन्याहू ने कहा कि इस समझौते से इज़राइल को लेबनानी सीमा पर सुरक्षा में नई गारंटी मिली है, और यह हिज़्बुल्ला और अन्य प्रतिरोध समूहों को पीछे धकेल देगा। वहीं दूसरी ओर, हिज़्बुल्ला ने इस समझौते को अस्वीकार कर करतर किया और इसे "शून्य और नल" घोषित किया, जिससे क्षेत्र में नई तनाव की लहर चल पड़ी है। समझौते की मुख्य बातें यह हैं कि इज़राइल ने लेबनान के दक्षिणी क्षेत्रों में फंसे हुए शरणार्थियों की आवाज़ को सुना है और उनकी सुरक्षा के लिए एक बफर ज़ोन स्थापित करने पर सहमति जताई है। इस प्रभावी कदम को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने कहा कि यह सीमावर्ती संघर्ष को कम कर सकता है और भविष्य में संभावित युद्ध अपराधों की रोकथाम में मददगार हो सकता है। लेकिन हिज़्बुल्ला के प्रत्युत्तर में, उन्होंने अपने क्षेत्रों में इज़राइल की सैन्य कार्रवाई को "अवैध" कहा और कहा कि उनके सहयोगी नागरिक युद्ध की तैयारी कर रहे हैं। इस बीच, दक्षिणी लेबनान में विस्थापित लोगों को अब नई सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुनर्वास मिल सकता है, परंतु अस्थायी शरणस्थलों की स्थिति अभी भी अटकलों में है। हिज़्बुल्ला के विरोध के बावजूद, इज़राइल और लेबनान के बीच यह समझौता एक नई कूटनीतिक दिशा को दर्शाता है। कई मध्य पूर्वी विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता युद्ध के निरंतरता को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, और इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं सामाजिक सहयोग के रास्ते खुले हैं। परन्तु हिज़्बुल्ला के समर्थक इस समझौते को अपनी राजनीतिक शक्ति को कमजोर करने के लिए एक चाल के रूप में देख रहे हैं, और उन्होंने लहूण के विभिन्न क्षेत्रों में नागरिकों को चेतावनी दी है कि वे इस समझौते को कबूल न करें। नतीजे के तौर पर, इस समझौते का भविष्य अभी अनिश्चित है। यदि इज़राइल और लेबनान के सरकारें शांति की दिशा में ठोस कदम उठाते हैं और हिज़्बुल्ला की आक्रामक प्रतिक्रिया को सीमित कर पाते हैं, तो यह स्थायी शांति की ओर एक बड़ी झलक हो सकती है। वरना, यदि हिज़्बुल्ला के पासस्थानीय समर्थन बना रहता है, तो संघर्ष का पुनरुत्थान भी संभव है। इस जटिल परिदृश्य में अंतरराष्ट्रीय समुदाय का सहयोग और मध्यस्थता अत्यंत आवश्यक होगी, ताकि इस इतिहासिक समझौते को ठोस शांति में परिवर्तित किया जा सके।

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✍️ By Pradeep Yadav | 27 Jun 2026