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Breaking News: अयोध्या मंदिर के दान मामले में झटके: चम्पट राय और अनिल मिश्रा ने दी इस्तीफा
🕒 1 hour ago

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में हालिया दान कांड ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर चर्चाओं को भड़का दिया है। इस विवाद के बीच ट्रस्ट के दो प्रमुख अधिकारी—संचालन प्रमुख चम्पट राय और वित्तीय प्रमुख अनिल मिश्रा—ने इस्तीफा दे दिया, जिससे इस मामले की जटिलता और भी बढ़ गई है। दोनों की पदस्थलीय उजागर करने वाली समिति (SIT) की जांच ने कई अनियमितताओं को सामने लाने के बाद इस कदम को मजबूर किया। असहमति, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और जनता का विश्वास क्षीण होने के बीच, यह इस्तीफे का कदम ट्रस्ट की आंतरिक पर्यवेक्षण प्रणाली की कमजोरियों को उजागर करता है। SIT की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रस्ट में दान की रिकॉर्डिंग, धनराशि का उपयोग और वितरण में गंभीर लापरवाहियां पाई गईं। कई बड़े दानकर्ता की राशि को गलत ढंग से वर्गीकृत किया गया और कुछ निधियों का उपयोग मंदिर निर्माण के बजाय अन्य प्रयोजनों में किया गया दिखा। इस जांच के बाद, चम्पट राय और अनिल मिश्रा पर नियामक निगरानी को नजरअंदाज करने और पारदर्शिता के सिद्धांतों का उल्लंघन करने का आरोप लगा। दोनों ने अप्रैल के मध्य में लेखी रूप में इस्तीफ़ा प्रस्तुत किया, और आगे की जांच में सहयोग करने का आश्वासन भी दिया। इस घटना पर राजनीति में भी हलचल मच गई। विपक्षी दलों ने इस कांड को सरकार की पारदर्शिता की कमी और सार्वजनिक फंडों के दुरुपयोग के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि ruling पार्टी ने इस मुद्दे को राजनीतिक जल में फेंकते हुए कहा कि यह विरोधी दलों का दायरा है। कई कांग्रेस राजनेता ने प्रधानमंत्री की इस मामले में मौन रहना को सवाल की कसौटी पर रखा और सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की। वहीं भाजपा के कार्यकर्ता इस इस्तीफे को ट्रस्ट के अंदरूनी सुधार का सकारात्मक संकेत मानते हुए, आगे की जांच को तेज करने का आह्वान किया। आगे देखते हुए, अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट को अपने भीतर के प्रशासनिक ढांचे को सुदृढ़ करने की अत्यावश्यक जरूरत है। धन प्रवाह की तेज़ी से निगरानी, उचित लेखा-जोखा और नियमित ऑडिट को अनिवार्य करके भविष्य में ऐसे कदाचार को रोका जा सकता है। साथ ही, जनता का भरोसा जीतने के लिए ट्रस्ट को पूर्ण पारदर्शिता के साथ दान प्रक्रिया को सार्वजनिक करना चाहिए। इस प्रकार, चम्पट राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे ने न केवल इस कांड को एक नया मोड़ दिया है, बल्कि मंदिर निर्माण में निष्ठा और साफ़गोई के लिये एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी पेश की है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 27 Jun 2026