मिम्बापुर में दोपहर के समय अहमदनगर में राष्ट्रीय प्रमुख अमित शाह ने शिवार्षि का एक नया अध्याय लिख दिया। बड़ोदा, पुरी और कोल्हापुर में कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करते हुए उन्होंने महाराष्ट्र के राजनीति की धूप-छाया में एक तीखी टिप्पणी की – "अब केवल एक शिवसेना मौजूद है"। यह बयान सीधे उधव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना को लक्षित था, जो पिछले साल में हुए फटे हुए गठबंधन के बाद से ही विरोधी मोर्चे पर दिख रही थी। शरद राजगुरु के जॉब में भी इस बात का उल्लेख किया गया कि अब ईकनाथ शिंदे का दल "फैक्शन" नहीं बल्कि "एक ही शिवसेना" बन गया है। अमित शाह ने कोल्हापुर में अंबाबाई मंदिर विकास परियोजना तथा महालक्ष्मी मंदिर के प्रांगण में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार का उद्घाटन करते समय यह संदेश दिया। उन्होंने कहा कि "भ्रष्टाचार और असंतोष को अंततः दूर करने के लिए एकजुट शिवसेना ही आवश्यक है" और उधव ठाकरे को इस दिशा में प्रेरित करने की कोशिश की। इस बीच, उधव ठाकरे ने अपने समर्थकों को आश्वस्त किया कि शिवार्षि का उद्देश्य जनता के कल्याण के लिए है और वह "भारी भरकम विरोध" का सामना कर रहे हैं। लेकिन अहमदनगर में अमित शाह की तीखी टिप्पणी ने शरद राजगुरु के दल को सही ताकत दिखाने की कोशिश की, जिससे महाराष्ट्र में शासक दल के बीच संतुलन और अधिक कसिद हो गया। शिवसेना की नई दिशा से जुड़ी यह असमानता राजनीतिक विशेषज्ञों के बीच बहस का कारण बन चुकी है। कई विश्लेषकों ने कहा कि अमित शाह के इस बयान का उद्देश्य भाजपा के गठबंधन में शासक दल के भीतर शिवसेना को एकल बिंदु बनाकर उन्हें मजबूर करना है, ताकि आगामी लोकसभा चुनाव में वोटों का मिलान आसान हो सके। वहीं, ईकनाथ शिंदे की ओर से यह संकेत मिला है कि वह अब शिवार्षि के साथ पूर्ण सहयोग में हैं और अपने राजनीतिक वजन को बढ़ाने के लिए इस अवसर का लाभ उठा रहे हैं। निष्कर्षतः, अमित शाह की इस टिप्पणी ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ खड़ा किया है। उधव ठाकरे की शिवार्षि अब स्पष्ट रूप से "एक नहीं, कई" स्वर में प्रतिपादन कर रही है, जबकि ईकनाथ शिंदे का दल अपनी स्वतंत्रता समाप्त कर एकजुट शिवसेना के रूप में सामने आया है। यह परिवर्तन आगामी चुनावी परिदृश्य में किस दिशा में ले जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है, परन्तु यह निश्चित है कि महाराष्ट्र की राजनीति में अब भी कई प्रतिद्वंद्वियों के बीच प्रतिस्पर्धा तीव्र होगी।