इटली की प्रधानमंत्री गर्जना गर्जा कर कहती हैं कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से कोई भी फोटो के लिये निवेदन नहीं किया। हालिया जी‑सेवन शिखर सम्मेलन में उत्तर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इटली की लीडर ने उनके साथ एक फोटो ले लेने के लिये "भिखारी" बनकर दबाव डाला। यह बयान, ट्रम्प के सामाजिक मीडिया पोस्ट में आया, जहाँ उन्होंने एक तस्वीर का उल्लेख किया जिसमें वह और इटली की लीडर एक साथ खड़ी दिखती हैं। लेकिन मेलोनी ने तुरंत इन आरोपों को झुठा कर खारिज कर दिया, कहा कि यह पूरी तरह से निर्मित कहानी है और उनका ट्रम्प से कोई ऐसी बातचीत नहीं हुई। मेलोनी ने अपनी टिप्पणी में कहा, "इटली और मैं कभी भी भिखारी नहीं हुए।" उनका मानना है कि इस प्रकार के मोहर को फैलाने का उद्देश्य ट्रम्प की लोकप्रियता को बढ़ावा देना है, जबकि वास्तविकता में उन्होंने कभी भी किसी फोटो के लिये 'भिखारू' बनने का आग्रह नहीं किया। इटली के मीडिया ने इस पर व्यापक चर्चा शुरू कर दी, जहाँ कई स्रोतों ने बताया कि ट्रम्प ने अपने बयान में इटली के साथ रिश्ते को खींचतान करने की कोशिश की है। इटली की सरकार ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को नुकसान नहीं पहुंचाने देंगी। जी‑सेवन शिखर सम्मेलन का माहौल भी इस विवाद के कारण हल्का नहीं रह सका। कई विश्व नेताओं ने इस बेमतलब के संघर्ष को दोहराते हुए कहा कि ऐसी बातों से अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर असर पड़ सकता है। बिटा, विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने इस विषय को उठाते हुए बताया कि ट्रम्प का यह बयान एक निजी उलझन या राजनयिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। इस बीच, इटली के भीतर भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है, जहां समाज में इस बात को लेकर विचारभिन्नता देखी जा रही है कि क्या राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा ऐसे बयानों से राजनयिक रिश्तों में बदलाव आएगा। इस विवाद का नतीजा अभी स्पष्ट नहीं है, परंतु एक बात निश्चित है कि इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने इस झूठे आरोप को दृढ़ता से खारिज कर दिया है और भारत तथा अन्य मित्र देशों से अपील की है कि सब अपने-अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दें। अंत में, इस प्रकार के झूठे आरोपों से सभी देशों को सतर्क रहने की जरूरत है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मंच पर शांति और सहयोग की भावना बनी रहे।