छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में राजनीतिक दांव-पेड़ों और सैंड माइनिंग के झगड़े ने एक भयावह घटना को जन्म दिया, जिससे भाजपा के प्रमुख सदस्य शंकर सिंह को अपनी ही गाड़ी में जलाकर मार दिया गया। यह घातक हताहत तब घटी जब शंकर सिंह की एसयूवी, जो दो ट्रकों के बीच फँसी हुई थी, को जलाकर प्रतिपक्षी परिवार के चार व्यक्तियों को गिरफ्तार कर लिया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह सैंड माइनिंग की भूमि को लेकर चल रहे विवाद का ही सीधा परिणाम था, जिसमें दो बड़े सख़्त प्रतिस्पर्धी परिवारों के बीच कई सालों से झड़प चलती आ रही है। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने मौके पर एक विस्तृत जांच शुरू की और प्रतिवादी पक्ष के चार व्यक्तियों को पहचान कर कप्तान कर लिया। इन चारों में सड़िया परिवार के दो क़दम और दो अन्य स्थानीय मुनाफ़े के लिये जुड़े लोग शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि शंकर सिंह की गाड़ी को ट्रकों के बीच फँसाते ही, प्रतिद्वंद्वियों ने उसमें इरादा-पूर्वक गैस जलाई, जिससे वह भस्म हो गई। दो अन्य लोग भी इस ज्वालामुखी में फंसे और उन्हें गंभीर जख्मों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस जघन्य कृत्य ने राज्य भर में गहरी उदासी और गुस्सा भर दिया है। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने तुरंत एकत्रित होकर शंकर सिंह के शहादत पर शोक व्यक्त किया और यह भी कहा कि इस अपशब्द को कड़ी सजा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा, "ऐसे भयानक अपराध को सख़्त क़ानूनों के तहत दंडित किया जाएगा और हम इस मामले की पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे।" स्थानीय जनता का कहना था कि सैंड माइनिंग के लिए बड़े पैमाने पर भूमि जाबता करने के कारण ही यह हिंसा उभरी है, और वह चाहते हैं कि सरकार इस क्षेत्र में नियामक कदम उठाए। जाँच इकाई ने पाया कि शंकर सिंह को उस दिन एक बड़े सैंड माइनिंग स्थल के पास से गुजरते समय ही घातक संचार मिला। पुलिस ने सभी संभावित साक्ष्य एकत्र कर लिए हैं, जिसमें सुरक्षा कैमरे की फुटेज, गवाहों के बयान और ज्वालामुखी के अवशेष शामिल हैं। अब चार गिरफ्तार किए गए लोगों को अदालत में पेश किया गया है, जहाँ पर उनके खिलाफ हत्या, साजिश एवं सार्वजनिक शांति को भंग करने के आरोप लगे हैं। अंत में यह घटना यह स्पष्ट करती है कि संसाधनों के लिए झड़पें कैसे सामाजिक और राजनैतिक स्थिरता को खतरे में डाल सकती हैं। अगर सैंड माइनिंग जैसी अनियमित गतिविधियों पर सख़्त नियंत्रण नहीं लगाया गया तो ऐसे षड्यंत्र और हिंसा फिर से उभरेगी। इसलिए, राज्य को चाहिए कि वह सख़्त नियम बनाकर इस तरह के अपराधों को रोके, साथ ही स्थानीय लोगों को आर्थिक वैकल्पिक अवसर प्रदान करे ताकि यह त्रासदी दोबारा दोहराई ना जा सके।