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Breaking News: शिवसेना के दो पक्षों के बीच दरार बढ़ी: सांसदों का दिल्ली दौरा, शिंदे की देर रात मुलाकात
🕒 1 hour ago

उद्धव ठाकरे की शिवसेना में हाल ही में खुलती हुई दरार ने राजनीतिक माहौल को खलबलाया है। कई सांसदों ने लगातार दिल्ली का रुख किया है, जबकि मुख्यमंत्री ईक्षण शिंदे भी देर रात की मुलाकातों में भाग ले रहे हैं। यह सब 'ऑपरेशन टाइगर' के नाम से चल रही इनसाइडर जानकारी के बाद हो रहा है, जहाँ पार्टी के भीतर दो समूहों के बीच राजनैतिक टकराव स्पष्ट रूप से झलक रहा है। उद्धव ठाकरे के समर्थन में एक समूह ने कांग्रेस और नेशनल कांग्रेसेस के साथ निकटता बढ़ा ली है, जबकि शिंदे का समूह राष्ट्रीय साझेदारी को मजबूती देते हुए, पार्टी के प्रशासनिक नियंत्रण को पकड़े रहने की कोशिश कर रहा है। इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण कदम उन सांसदों का दिल्ली आना रहा है, जो शहरी राजनीति के हॉटस्पॉट में अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, इस यात्रा में लगभग पंद्रह करोड़ रुपये की निधि प्रदान करने का वादा भी किया गया, जिससे सांसदों को आर्थिक समर्थन मिल सके। इस वित्तीय समर्थन को उद्धव का पक्ष पार्टी के भीतर अपने समर्थन को बँधाए रखने की रणनीति के रूप में देख रहा है। वहीं, शिंदे के पक्ष ने भी अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक सख्त रुख अपनाया है, जिससे उन्हें अपनी वैधता और शक्ति को दिखाने का अवसर मिला है। शिवसेना के भीतर नेतृत्व की कमी और वोटर बेस के समर्थन में गिरावट भी इस विभाजन का कारण बन रही है। कई विश्लेषकों ने कहा है कि उद्धव के समर्थकों को अब पार्टी के भीतर से बाहर निकलने की इच्छा बढ़ रही है, क्योंकि उन्हें लगता है कि वर्तमान नेतृत्व के तहत कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो रहा। इसी बीच, शिंदे ने रात में छह यूबीटी सांसदों के साथ एक गुप्त मुलाकात की, जिसमें उन्होंने इस बिखराव को नियंत्रित करने के उपायों पर चर्चा की। यह मुलाकात देर रात में हुई, जिससे इसका रहस्य और भी गहरा हो गया, और पार्टी के भीतर की असमन्वय की नई झलक दिखी। पार्टी के अंदरूनी लोगों ने यह भी कहा कि इस बंटवारे को रोकने के लिए कांग्रेस और राष्ट्रीय गठजोड़ के साथ मिलकर एक मुनाफाखोर रणनीति बनाई जा रही है। विपक्षी दलों का समर्थन और आर्थिक प्रोत्साहन दोनो पक्षों को एक साथ लेकर चलने में मदद कर रहा है, जिससे विभाजन के अवसर कम हो रहे हैं। हालांकि, इस संघर्ष के बीच, सदस्य अरविंद सावंत ने स्पीकर को अपील की है कि कोई भी 'ब्रेकअवे' ब्लॉक को मान्यता न दे, जिससे संघटनात्मक रूप से पार्टी की अखंडता बकाया रहे। निष्कर्षतः, उद्धव ठाकरे की शिवसेना में आजकल का विभाजन न सिर्फ राजनैतिक शक्ति के पुनर्वितरण को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि आर्थिक समर्थन और रणनीतिक गठजोड़ इस बंटवारे को और गहरा कर रहे हैं। सांसदों की दिल्ली यात्रा और शिंदे की देर रात की हडल वाकई में पार्टी के भीतर के तनाव को और भी स्पष्ट कर रही है। अब आगे देखना होगा कि ये दो समूह किस मोड़ पर एकजुट होते हैं या फिर एक-दूसरे को और अधिक कमजोर करते हुए, महाराष्ट्र की राजनीति में नया अध्याय लिखते हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 17 Jun 2026