महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर धूम मची है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाला शिबा सेना (उभय) आगामी दिनों में दो टुकड़ों में बंटने की संभावना के कगार पर खड़ा है। यह अफवा कई स्रोतों के माध्यम से सामने आई है, जिसमें राजनैतिक नियुक्तियों, फोन कॉलों, तथा आर्थिक दावों का जिक्र है। पहले चरण में उद्धव सर की टीम ने विभिन्न जिलों में इंटर्नल मीटिंग बुलाने का प्रस्ताव रखा था, परन्तु इन मीटिंगों की तिथि तय नहीं हो पाई और कई प्रमुख नेताओं को सूचित नहीं किया गया। इस असंतोष के चलते कई सांसदों ने अपने फोन बंद कर लिये, जिससे मुख्यालय से संपर्क बनाना भी कठिन हो गया। इस बीच, दिल्ली में शिबा सेना के दोहरा पक्षीय दल के सदस्य अपने-अपने बैठकों में जुटे हुए हैं, जहाँ वे अपने अगले कदमों पर विचार कर रहे हैं। दूसरी ओर, शिबा सेना (उभय) के एक प्रमुख नेता ने आज रात के लिए 15 करोड़ रुपये का भुगतान करने की बात कही, जिससे सांसदों और कार्यकर्ताओं में आशंका उत्पन्न हुई कि यह धनराशि राजनैतिक दांव की तैयारी के लिए उपयोग की जा रही है। वित्तीय प्रस्ताव के बारे में विस्तार से जानकारी नहीं मिली, परंतु यह स्पष्ट है कि इस राशि की घोषणा को एक बड़ी चाल के रूप में देखा जा रहा है। इसी दौरान, दिग्गज नेता एखनाथ शिंदे ने भी इस पक्षपात के संदेह को उठाते हुए कहा कि उनके पक्ष में भी कई सांसद दिल्ली पहुंच चुके हैं और नई रणनीति तैयार कर रहे हैं। शिंदे के समर्थकों ने बाल ठाकरे के विचारों को पुनः उजागर करते हुए कहा, "हमारे द्वार हमेशा खुले हैं" और यह संकेत दिया कि शिंदे के अनुयायी भी इस भीतर के संघर्ष में अपना हिस्सा निभाने को तैयार हैं। निष्कर्षतः, उद्धव ठाकरे के शिबा सेना में फिर से विभाजन की हवा तेज़ी से चल रही है। मीटिंग की अनिश्चितता, संपर्कहीन सदस्य, बड़े आर्थिक दांव और दोनों धड़ों के नेता एकत्रित होकर नई रणनीति तैयार कर रहे हैं—इन सबका संकेत है कि महाराष्ट्र में शिबा सेना का भविष्य अनिश्चित है। यह विकास न केवल राज्य की राजनीति को बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी गहरा असर डाल सकता है, क्योंकि शिबा का समर्थन कई राष्ट्रीय गठबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। आगे की घटनाओं का इंतजार रहेगा, परन्तु अभी यह साफ़ है कि शिबा सेना का अगला चरण कौन-सा होगा, यह काफी हद तक इस बंटवारे की तीव्रता पर निर्भर करेगा।