विश्व के प्रमुख छह सदस्यों और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधियों की बैठक, अर्थात् जी‑७ शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर अपने विचार रखे – आज की वैश्विक व्यवस्था में भरोसे की गंभीर कमी छा गई है। अपने संबोधन में मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नींव भरोसा ही होना चाहिए, परन्तु हालिया घटनाओं ने इस नींव को हिलाकर रख दिया है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि आर्थिक प्रतिस्पर्धा, प्रौद्योगिकी में तेज़ी से हो रही उन्नति और सुरक्षा संबंधी तनाव ने देशों के बीच पारस्परिक विश्वास को कमज़ोर कर दिया है, जिससे वैश्विक शांति और विकास के सिद्धांत पर असर पड़ रहा है। प्रधानमंत्री ने यह भी उजागर किया कि भरोसे की कमी से उत्पन्न होने वाले आर्थिक बहिष्कार, व्यापार प्रतिबंध और सैन्य गठबंधन केवल राष्ट्रीय हितों को ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण मानवता के कल्याण को भी बाधित करते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत ने हमेशा बहुपक्षी सहयोग, खुली वाणिज्य प्रणाली और पारदर्शी राजनयिक संवाद को प्राथमिकता दी है, और इस दिशा में काम करते हुए वह सभी देशों के साथ विश्वसनीय साझेदारी बनाने का प्रयास कर रहा है। साथ ही, महामारी के बाद की आर्थिक पुनरुद्धार की प्रक्रिया में भरोसे की पुनर्स्थापना को प्रमुखता देनी चाहिए, क्योंकि वही निवेश, तकनीकी हस्तांतरण और ज्ञान के आदान‑प्रदान को पुनर्जीवित करेगा। मोदी ने जी‑७ के सभी नेताओं से आह्वान किया कि वे अपने-अपने देशों में भरोसे को पुनर्स्थापित करने के उपाय अपनाएँ। उन्होंने सुझाव दिया कि अनावश्यक सैन्य आधिपत्य को समाप्त कर, सूचना की स्वतंत्रता को बढ़ावा दें तथा अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को सुदृढ़ बनाकर पारस्परिक भरोसे का माहौल निर्मित किया जाए। इस संदर्भ में उन्होंने कई क्षेत्रों में सहयोग के नए मार्ग प्रस्तावित किए, जैसे जलवायु परिवर्तन का संयुक्त समाधान, साइबर सुरक्षा के लिए विश्व स्तर पर मानकीकृत नियम, तथा मुक्त वाणिज्य के तहत समान नियमों के तहत व्यापार को प्रोत्साहित करना। अंत में, प्रधानमंत्री ने कहा कि भरोसे की कमी केवल एक राजनयिक समस्या नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भी गहरा प्रभाव डालती है। भारत इस भरोसे को पुनः स्थापित करने के लिए एक सकारात्मक, समावेशी और निष्ठावान भूमिका निभाने को तैयार है। उनका यह संदेश न केवल जी‑७ शिखर में सुनाई दिया, बल्कि विश्व के सभी राष्ट्रों के लिए एक प्रेरणा का काम करेगा, जिससे आशा है कि शांति, समृद्धि और सहयोग की नई दिशा स्थापित होगी।