जून के मध्य में फ्रांस के पेरिस में आयोजित जी‑७ शिखर सम्मेलन का पहला दिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय की रुचि का केंद्र बना। इस मंच पर अमेरिका, जापान, जर्मनी, इटली, कनाडा, यूके और यूरोपीय संघ के प्रमुख नेताओं ने रूस को युक्रेन के विरुद्ध चल रही सैन्य कार्रवाई को तुरंत बंद करने और शांति समझौता करने का आवाहन किया। नेता‑मुख्य जब भी अपने‑अपने बयानों में कहा, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि युद्ध केवल मानवीय पीड़ा बढ़ा रहा है और क्षेत्रीय अस्थिरता को और अधिक बढ़ा रहा है। इस दौरान फ्रांस के राष्ट्रपति ने यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की को विशेष आमंत्रण देते हुए कहा कि जी‑७ के सभी सदस्य इस संघर्ष के समाधान में एकजुट हैं और रूस पर अनिवार्य दबाव बनाए रखने के लिए कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य उपायों को मिलकर लागू करेंगे। समागम में संयुक्त राज्य के राष्ट्रपति ने रूस से सीधे अनुरोध किया कि वह युक्रेन में अपने सैनिकों को तुरंत वापसी करे और यूक्रेन के साथ शांति वार्ता में भाग ले। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन आवश्यक है और यदि रूस इस दिशा में कदम नहीं उठाएगा तो आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा किया जाएगा। अन्य शीर्ष नेताओं ने भी इस दिशा में स्वर उठाया, जैसे कि जर्मनी की चांसलर ने कहा कि यूरोपीय संघ के सभी सदस्य इस प्रयास में साथ देंगे और ऊर्जा सहयोग, वित्तीय समर्थन तथा सैन्य सहायता के माध्यम से यूक्रेन को सुदृढ़ करेंगे। इटली के प्रधानमंत्री ने इज़राइल-फ़िलिस्तीन मुद्दे को भी बहुत संक्षिप्त रूप में उल्लेख किया, परंतु मुख्य बिंदु रूस के खिलाफ एकजुटता के थे। रूस की ओर से कोई औपचारिक उत्तर नहीं आया, परंतु मंच पर उपस्थित कई प्रमुख नेता, विशेषकर अमेरिकी प्रतिनिधि, ने कहा कि यदि रूस अपने निरस्त्रीकरण के कदम नहीं उठाता है तो जी‑७ के सामूहिक प्रतिबंधों को और सख्त किया जाएगा। इस संदर्भ में, जी‑७ ने रूसी तेल और गैस की निर्यात पर नए प्रतिबंधों की संभावनाओं पर चर्चा की और बतौर वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर स्विच करने की योजना को तेज किया। साथ ही, जी‑७ देशों ने यूक्रेन को अतिरिक्त सैन्य उपकरण, आर्थिक सहायता और पुनर्निर्माण के लिए वैश्विक फंड स्थापित करने की घोषणा भी की। समापन के समय, सभी देशों के प्रतिनिधियों ने मिलकर एक संयुक्त घोषणापत्र जारी किया, जिसमें रूस को शीघ्र युद्ध समाप्ति की तत्काल माँग, मानवीय सहायता के unhindered पहुँच, और शांति वार्ता के लिए तैयार रहने का आग्रह किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि यदि रूस इस चुनौती को स्वीकार नहीं करता, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामूहिक कदमों में और बढ़ोत्तरी की जाएगी। इस प्रकार, पहला दिन मुख्य रूप से रूस पर कठोर दबाव डालने, यूक्रेन को समर्थन सुदृढ़ करने और विश्व शांति की दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए समर्पित रहा।