भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने चेतावनी जारी की है कि इएल नीनो अब भारत की हवामान प्रणाली में प्रवेश कर चुका है और मानसून के दौरान और भी तीव्र रूप में उभरने की संभावना है। यह ज्वालामुखीय समुद्री तापमान में असामान्य वृद्धि का परिणाम है, जिससे समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक हो जाता है। इएल नीनो के कारण पश्चिमी घोड़ों में वर्षा की मात्रा घटती है, समुद्र में वाष्पीकरण बढ़ता है और दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में शुष्कता का खतरा बढ़ जाता है। आईएमडी ने कहा कि इस वर्ष के मानसून में इएल नीनो के प्रभाव से असमान वर्षा, अत्यधिक तापमान, बाढ़ और जलसंकट जैसे कई जलवायु विषमताएँ उत्पन्न हो सकती हैं। इएल नीनो की वजह से भारत के लगभग दो सौ जिलों में पहले से ही असामान्य मौसम की चेतावनियां जारी हो चुकी हैं। कृषि मंत्रालय ने इन जिलों को आपातकालीन मोड में डाल दिया है, क्योंकि फसल बुआई के लिए जरूरी बरसात में कमी और तापमान में अत्यधिक वृद्धि से कृषि उत्पादन पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से उत्तर-पूर्वी राज्यों, पश्चिमी घाट और मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों में फसलें बिन-वर्षा के संकट में पड़ने की संभावना बढ़ी है। इस परिप्रेक्ष्य में, किसानों को फसल बीमा, वैकल्पिक फसल रसद और अतिरिक्त सिंचाई सुविधाओं की त्वरित व्यवस्था की मांग कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस इएल नीनो की प्रगति न केवल भारत बल्कि विश्व स्तर पर भी कई आर्थिक और मनुष्यों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकती है। उच्च तापमान के कारण हीटवेव की घटनाओं में वृद्धि, जलाशयों का सूखना, और जंगलों में आग लगना जैसे जोखिम बढ़ रहे हैं। साथ ही, इएल नीनो के कारण समुद्र में अल्बिडो में बदलाव के कारण समुद्री तूफानों की तीव्रता भी बढ़ सकती है, जिससे तटीय क्षेत्रों में बाढ़ और लहरों की धमकी बढ़ेगी। इन जोखिमों के मद्देनज़र, सरकार ने आपदा प्रबंधन एजेंसियों को त्वरित कार्यवाही करने का निर्देश दिया है। राज्य स्तर पर चेतावनी प्रणाली को सक्रिय किया जाएगा, जल संरक्षण और जलसंकट प्रबंधन के लिए विशेष योजनाएँ बनायी़ँ जाएँगी, और मौसम विज्ञान विभाग के आधार पर सटीक भविष्यवाणी के माध्यम से किसान एवं नागरिकों को समय पर सूचना पहुंचाई जाएगी। साथ ही, वैकल्पिक जलस्रोतों का विकास, जलराशि संचयन, और जलवायु अनुकूलित फसल विधियों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्रीय और राज्य स्तर पर अनुदान मुहैया कराए जाएंगे। निष्कर्षतः, इएल नीनो का आगमन और मानसून के दौरान इसकी बढ़ती ताकत भारतीय कृषि, जल संसाधन और आम जनजीवन के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रही है। समय पर सतर्कता, सक्रिय योजना और वैज्ञानिक आंकड़ों पर आधारित निर्णय इस संकट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। नागरिकों को अपने घर-परिवार की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय अपनाने चाहिए, जबकि सरकार को इस प्रकृति की आपदा के खिलाफ संपूर्ण राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।