अहमान के पासवर्ड वाले एक शांतिपूर्ण शनिवार को, 23 अगस्त 2022 को भारतीय विमान एयर इंडिया फ्लाइट 171 ने अहमदाबाद के पास ही अपने पंखों को इधर-उधर करके गड़गड़ाई और अंत में जलधुएँ में बदल गई। इस त्रासदी में 190 से अधिक यात्रियों और दल के सदस्यों ने अपना प्राण गंवाया, जबकि केवल एक ही व्यक्ति बच सका। आज वह अकेला बचे हुए यात्रा, जो अपने देश के झंडे के पंखों ने तोड़ा, ने एक साल बाद भी पूरे दिल से कहा, "शांति कभी नहीं मिल पाएगी"। उसकी बातें इस दुर्घटना के दर्द को फिर से जगाती हैं, और उन सभी के लिए चेतावनी बन गई हैं जो अपने जीवन को निस्संदेह मानते हैं। आगे बढ़ते हुए वह बताता है कि दुर्घटना के बाद उसके मन में लगातार भय और अपराध का अहसास बना रहता है। वह कहता है, "मुझे यह नहीं समझ आता कि मैं क्यों बचा और बाकी सभी क्यों नहीं।" उसकी आवाज़ में वह गहरी पीड़ा स्पष्ट होती है, क्योंकि वह जानता है कि उसके साथ रहने वाले हर एक परिवार को अब अनंत पीड़ा झेलनी पड़ेगी। कई दिनों तक वह खुद को कसकर धीरज रहीं, लेकिन उसकी यादें इस बात पर कठिन होते चाहिए कि न्याय की आवाज़ अभी तक नहीं सुणी गई है। दुर्घटना के एक साल बाद, परिवारों ने भी अपनी निराशा को आवाज़ दी। अनेक माताएँ, पिताएँ और सगे संबंधी अब भी न्याय की आशा में खड़े हैं। वे अदालत में एक निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं, जिससे सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदारियों का निर्धारण हो सके। इस बीच, एयरोनॉटिकल विशेषज्ञों ने भी कहराते हुए कहा है कि विमान में तकनीकी खामियों के कारण ही यह ग्रसित हुआ, परंतु अभी भी रिपोर्ट के आधिकारिक रिलीज़ में देरी का सामना करना पड़ रहा है। निष्कर्षतः, यह त्रासदी केवल एक विनाशकारी दुर्घटना नहीं रही, बल्कि यह लोगों के दिलों में शांति और न्याय के लिए गहरी भूख छोड़ गई है। जीवित बचे की आवाज़ और पीड़ितों के परिवारों का संघर्ष हमें इस बात की याद दिलाता है कि सुरक्षा, ज़िम्मेदारी और सत्यनिष्ठा को हमेशा प्राथमिकता देना चाहिए। जब तक सभी संबंधित पक्ष इस दर्द को समझकर उचित कदम नहीं उठाते, तब तक शांति का क्षण भी नहीं आएगा।