आज विदेश मंत्री संजीव चंद्रा जैशंकर ने एक साक्षात्कार में बताया कि भारत ने 2022 से ही अमेरिकी अनुरोध पर रूसी तेल की खरीदारी शुरू कर दी थी। उन्होंने यह खुलासा किया कि यह कदम केवल ऊर्जा की स्थिरता के लिये नहीं, बल्कि वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता को रोकने के लिये भी उठाया गया था। इस बयान के बाद कई देशों और विशेषज्ञों ने भारत की इस नीति को दोबारा देखने की मांग की है, जबकि भारत का कहना है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए यह कदम आवश्यक था। जैशंकर ने बताया कि जब यूएस ने भारत को रूसी तेल खरीदने से बचने के लिये एक टैरिफ लगाया, तो भारत ने अमेरिकी दबाव को स्वीकार किया और तब से शुरू में रूसी तेल की आयात मात्रा को सीमित किया। लेकिन बाद में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तीव्र वृद्धि और आपूर्ति में कमी के कारण, अमेरिकी दबाव कम हो गया और टैरिफ भी हटा दिया गया। तब भारत ने पुनः रूसी तेल की खरीद को बढ़ाया, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली। विदेश मंत्री ने कहा, "हमने अमेरिकी अनुरोध पर रूसी तेल खरीदा, परन्तु यह हमारे राष्ट्रीय हितों के अनुरूप था।" उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने किसी भी तरह के प्रतिबंध या प्रतिबिम्ब का उल्लंघन नहीं किया, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने के लिये सहयोगी कदम उठाए। इस कदम के पीछे भारत के निर्णयों में कई प्रमुख कारक शामिल थे। प्रथम, भारत की तेल आयात पर निर्भरता लगातार बढ़ रही थी और घरेलू मांग को पूरा करने के लिये अतिरिक्त स्रोतों की आवश्यकता थी। द्वितीय, रूसी तेल की कीमत तुलनात्मक रूप से सस्ती होने के कारण आर्थिक लाभ प्रदान कर रहा था। तृतीय, अमेरिकी टैरिफ हटाने के बाद भारत को फिर से रूसी तेल के साथ व्यापार करने में कोई प्रतिबंध नहीं रहा। इन कारणों से भारत ने अपनी ऊर्जा नीति में रूसी तेल को एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में अपनाया। जैशंकर ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत ने यूरोपीय देशों के साथ हथियारों के व्यापार को लेकर अमेरिकी संदेश को चुनौती दी है। उन्होंने कहा, "यूरोप हथियार बेचता है, जिन्हें भारत के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है, जबकि वही अमेरिका रूसी तेल पर दोधारी नीति अपनाता है।" इस टिप्पणी ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका की द्विश्रुष्ट नीति को उजागर किया और भारत की स्वतंत्र एवं संतुलित विदेश नीति की पुष्टि की। निष्कर्षतः, विदेशी दबाव और बाजार की बदलती परिस्थितियों के बीच भारत ने अपने राष्ट्रीय हित को आगे बढ़ाते हुए रूसी तेल की खरीदारी को जारी रखा। यह कदम न केवल ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, बल्कि भारत को अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रणनीतिक सहयोगियों के साथ संतुलित संबंध स्थापित करने में मदद करता है। विदेश मंत्री जैशंकर के इस खुलासे ने भारत की स्वतंत्रता और pragmatic नीति को स्पष्ट किया, जबकि वैश्विक ऊर्जा प्रणाली में भारत की भूमिका को भी नई दिशा प्रदान की।