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Breaking News: तीन बिंदु पर ताना-बाना: आविष्कर बैनर्जी की अहंकारी रवैये को संभालें तृणमूल दिग्गज
🕒 1 hour ago

न्यूनतम तीन पैराग्राफ में व्यवस्थित इस लेख की शुरुआती पंक्तियों में हम देखेंगे कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में आजकल किस प्रकार त्रिनामूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर गहरी खाई तैयार हो रही है। गठजोड़ के नेता ममता बनर्जी के करीबी और पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुखों में से एक, अभिषेक बैनर्जी के प्रति बढ़ते विरोध की लहर ने कई स्तरों पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। कई वरिष्ठ सदस्य, जिनमें कई सांसद और राज्य के प्रमुख नेता शामिल हैं, अब खुलकर यह कह रहे हैं कि बैनर्जी की उच्च-हाथी रवैया केवल व्यक्तिगत क्षमताओं को नहीं, बल्कि पार्टी के दीर्घकालिक लक्ष्य को भी खतरे में डाल रहा है। इस सिलसिले में उनके कारनामों और विचारों को लेकर उठाए गए सवाल, उत्तरार्ध में चुप्पी तोड़ते हुए, अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा के बिंदु बन चुके हैं। इसी बीच, वर्तमान में टीएमसी के भीतर कई वरिष्ठ नेता अपने आप को "अनिच्छा" या "असंतोष" के रूप में व्यक्त करने से नहीं बच पा रहे हैं। एक वरिष्ठ पुनरावर्ती सदस्य ने बताया कि वह अभिषेक बैनर्जी के द्वारा किए जा रहे विभिन्न निर्णयों से निराश हैं, क्योंकि उनके कहे अनुसार बैनर्जी ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने एकाधिकार को ज़्यादा बढ़ा दिया है। निरंतर शिकायतें यह संकेत देती हैं कि बैनर्जी के नेतृत्व में निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और लोकतांत्रिक मूल्यों का अभाव है। इस कारण से कई विधायक और सांसद अब पार्टी के भीतर अलगाव की स्थिति बना रहे हैं और दिल्ली में एक अलग ब्लॉक बनाने की योजना बना रहे हैं, जिससे राष्ट्रीय गठबंधन (एनडीए) को भी समर्थन मिल सके। यह कदम न केवल टीएमसी के लिए बड़ा झटका हो सकता है, बल्कि पश्चिम बंगाल की सत्ता संरचना को भी पुनः आकार दे सकता है। भविष्य को देखते हुए, यह स्पष्ट हो रहा है कि अगर ममता बनर्जी इस मुद्दे को हल नहीं करती हैं, तो पार्टी के भीतर विद्रोह का क्षणिक उधड़ना निरंतर विस्तारित हो सकता है। अभिष्क बैनर्जी की अहंकारी नीति को समझते हुए कई अनुभवी नेता अब सीधे तौर पर पाटी के मुख्यालय में एकजुट होकर विरोध की आवाज़ उठा रहे हैं। यह स्थिति न केवल पार्टी के भीतर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी गहरा प्रभाव डालेगी। यदि इस चरण में समाधान नहीं निकाला गया, तो त्रिनामूल कांग्रेस का संकल्पित लोकतांत्रिक सम्मान और जन-भजन का नारा धूमिल हो सकता है, जिससे पश्चिम बंगाल के राजनीतिक माहौल में अस्थिरता का नया दौर शुरू हो सकता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 11 Jun 2026