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Breaking News: तीमसी के संकट में नई धड़कन: प्रकाश चिक बराइक ने रज्य सभा से इस्तीफा, इस हफ्ते तीसरा नेता हटता
🕒 1 hour ago

त्रिनामुल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही आंतरिक बगावत ने इस हफ्ते एक और उच्च स्तर के राजनेता को राजभवन से हटाया। पश्चिम बंगाल की संसद सदस्य तथा रज्य सभा के सदस्य प्रकाश चिक बराइक ने आज सुबह अपने पद से इस्तीफा दिया, जिससे पार्टी में शासन संकट के पहले ही दिन के बाद तीसरी बड़ी गिरावट आई। बराइक, जो पहले ही इस सप्ताह दो अन्य प्रमुख टीएमसी नेताओं की जगह से हटाए गए, अपनी प्रस्थापित स्थिति को छोड़ कर 'आत्मनिर्णय' का अधिकार प्रयोग कर रहे हैं। उनका इस्तीफा टोलिया बोसवाल की अध्यक्षता में स्थापित नई गठित 'डिसिप्लिन समिति' के दबाव और पार्टी मुख्य मंत्री ममता बनर्जी के निरंतर विरोध के बीच आया। बराइक का इस्तीफा कई कारणों से प्रेरित माना जा रहा है। प्रथम तो, ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी के भीतर सर्बसत्तात्मक शैली को लेकर कई बीसियों में असंतोष गहरा हो रहा था। कई सदस्यों ने यह भी कहा कि उनका गठबंधन सरकार में हुए मुख्य नीति निर्णयों से अभिभूत होकर अब अधिक स्वायत्तता की मांग कर रहा था। द्वितीय, बराइक ने सार्वजनिक रूप से कहा कि "सबसे कठिन समय में भी मुझे अपने विचार रखने का अधिकार है" और वह अब अपने मतभेदों को खुले तौर पर व्यक्त कर सकेंगे। इन बयानों से यह स्पष्ट हो रहा है कि उनका इस्तीफा राजनीतिक निराशा से नहीं बल्कि व्यक्तिगत सिद्धान्तों के कारण है। बराइक के इस्तीफा के बाद टीएमसी में तनाव की स्थिति आधे से अधिक कठिन हो गई है। इस सप्ताह में अब तक दो अन्य रज्य सभा सदस्य भी अपने पदों से हटाए जा चुके हैं, जिससे पार्टी का राजनैतिक संतुलन बिगड़ रहा है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह प्रवाह जारी रहा तो ममता बनर्जी को सत्ता में बने रहने के लिए कठिन विकल्पों का सामना करना पड़ेगा। टीएमसी के विरोधी दल और केंद्र सरकार ने इस अवसर का फायदा उठाते हुए पार्टी के भीतर व्याप्त असंतोष को बढ़ावा दिया है, जिससे आगामी चुनावों में टीएमसी के प्रदर्शन पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं। समाप्ति में कहा जा सकता है कि प्रकाश चिक बराइक का इस्तीफा केवल एक व्यक्तिगत निर्णय ही नहीं, बल्कि टीएमसी के भीतर दलित और बहु-प्रतिनिधित्व वाले समूहों के उदासीनता का प्रतीक है। इस कदम ने पार्टी को अपने भीतर की समस्याओं को फिर से जांचने और एक समन्वित रणनीति तैयार करने का अवसर प्रदान किया है। यदि ममता बनर्जी इस संकट को सुलझाने में सफल होती हैं, तो यह उनके नेतृत्व की मजबूती को सिद्ध करेगा; अन्यथा यह पार्टी के भविष्य के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 11 Jun 2026