ओमान के सागर सीमा के निकट स्थित एक मालवाहक जहाज़ पर अचानक हुए हमले में 21 दलियों को बचाया गया, परंतु तीन भारतीय नौसेना कर्मी अभी भी लापता हैं, यह खबर भारत सरकार ने आज सार्वजनिक की। इस घातक हमले के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुरंत मिशन तैयार किया और ओमान के साथ मिलकर आपातकालीन बचाव कार्य शुरू किया। जहाज़ पर मौजूद 23 भारतीय दलियों में से 21 को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि तीन लोगों की स्थिति अभी भी अज्ञात है। हफ्ते की शुरुआत में, जब जहाज़ अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर यात्रा कर रहा था, तो उसे अज्ञात दुश्मन द्वारा प्रहार किया गया। प्रारम्भिक रिपोर्टों के अनुसार, हमले के बाद जहाज़ के नीचे एक बड़ा छेद आ गया, जिससे जल स्तर तेजी से बढ़ता गया और जहाज़ डूबने के कगार पर पहुंच गया। इस दौरान जहाज़ के एक हिस्से में स्थित भारतीय चालक दल ने तुरंत ही SOS भेजा, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान आकर्षित हुआ। बचाव कार्य में ओमान की नौसेना, भारतीय नौसेना और अंतरराष्ट्रीय समुद्री खोज दलों ने संयुक्त रूप से प्रयास किया, और अंततः 21 दलियों को बचा कर दिल की राहत मिली। बचाए गए दलियों ने बताया कि हमला अचानक और बिना किसी चेतावनी के हुआ। वे अभी तक नहीं बता पाए कि उन्हें किसके द्वारा और किस उद्देश्य से निशाना बनाया गया। लेकिन विश्वसनीय सूत्रों ने संकेत दिया कि इस हमले में संभवतः यूएस द्वारा लॉन्च किए गए एक मिसाइल की भागीदारी हो सकती है, जैसा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में उल्लेखित है। भारतीय सरकार ने इस घटना को कड़ी निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को उठाने की योजना बना रही है। साथ ही, भारत ने ओमान के साथ मिलकर इस घटना की पूरी जांच का आदेश दिया है, ताकि जिम्मेदारों को दंडित किया जा सके। अंत में, इस आपदा ने समुद्री सुरक्षा की अनिवार्यता को फिर से उजागर किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर सम्भव कदम उठाएगा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है। तीन लापता भारतीयों के मिलने की आशा में, परिवार और सरकार दोनों ही दुआओं में लगे हुए हैं। इस हादसे के बाद, भारतीय जहाज़ी दलों के अधिकार और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिये नई नीतियों की रूपरेखा तैयार करने की भी बात चली है।