प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के इतिहास में सबसे लंबे समय तक चुने गए प्रधान मंत्री बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। इस उपलब्धि के साथ-साथ केंद्र सरकार ने आय कर और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के नियमों में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं, जो सीधे करदाताओं के जीवन को प्रभावित करेंगे। इस लेख में हम इन बदलावों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करेंगे, ताकि हर करदाता अपने अधिकारों और दायित्वों को समझ सके। सबसे पहले आय कर के नवीनतम संशोधनों पर नज़र डालते हैं। नया बेसिक आय कर स्लैब दो साल पहले के मुकाबले अधिक कोर्यूर है, जिससे मध्यम आय वर्ग की कर देना जैसी बोझ घटेगी। साथ ही, कई नई राहतों का विस्तार किया गया है, जैसे हाउसलोन एक्वीटी पर छूट और स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर अधिक कटौती की अनुमति। इसके अतिरिक्त, डिजिटल लेनदेन पर 0.5 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट प्रदान की गई है, जिससे इलेक्ट्रॉनिक बहीखाता रखने वाले व्यापारियों को लाभ होगा। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्षेत्र में भी काफी पुनरावलोकन किया गया है। कई वर्गों की कर दरों को पुनः निर्धारित किया गया, जिससे कुछ आवश्यक वस्तुओं पर दरें घटाई गईं और कुछ लक्ज़री वस्तुओं पर दरें बढ़ाई गईं। विशेष रूप से, कृषि उत्पादों और बुनियादी आवश्यक खाद्य पदार्थों पर शून्य प्रतिशत दर लागू की गई, जिससे उपभोक्ताओं के खर्च में कमी आएगी। वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक वाहन जैसी उच्च मूल्य वाली वस्तुओं पर 18 प्रतिशत की दरें 28 प्रतिशत तक बढ़ा दी गई हैं, जिससे राजस्व में वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। इन सब बदलावों का उद्देश्य आर्थिक पारदर्शिता और कर आधार को विस्तारित करना है, ताकि कर संग्रह में सुधार हो और विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हों। करदाताओं को सलाह दी गई है कि वह नवीनतम नियमों को ध्यान में रखते हुए अपने टैक्स रिटर्न को अपडेट करें और आवश्यक दस्तावेज़ों को सही समय पर जमा करें। यदि कोई शंका या असुविधा महसूस करे, तो नजदीकी आय कर कार्यालय या जीएसटी पोर्टल से संपर्क कर सकेंगे। अंत में, यह कहा जा सकता है कि मोदी सरकार के इन आर्थिक सुधारों से कर प्रणाली अधिक सरल और समान हो सकती है, परन्तु इसके सफल कार्यान्वयन के लिए करदाता वर्ग का सहयोग अनिवार्य है।