बेलफ़ास्ट के शहरी केन्द्र में एक चाकू हमले ने शहर को भयानक उथल-पुथल में डाल दिया। शाम के समय जब कई लोग अपने काम-कार्यों में व्यस्त थे, तभी एक अज्ञात हमलावर ने अति-आक्रामक ढंग से दो व्यक्तियों को घातक वार किया। इस हिंसक घटना के तुरंत बाद, नफरत भरी भीड़ ने असहाय नागरिकों को लक्षित कर दिया और इमारतों, कारों, और सार्वजनिक वाहनों को ज्वलनशील पदार्थों से भर दिया। कई घरों की खिड़कियों को तोड़कर आग लगाई गई, जिससे लगभग सैकड़ों लोग बेघराव में रह गये। अत्यधिक आक्रामकता के साथ प्रवासियों के विरुद्ध भी हिंसा का भड़का था। कई दलों ने प्रवासियों को 'बेरहमी' से बेघर कर दिया और उन्हें शरणस्थली से बाहर निकालने की कोशिश की। यह सब तब हुआ जब स्थानीय प्रशासन ने घटना के तुरंत बाद ताबेदार बलों को बुलाया था, परंतु भीड़ की तीव्रता के कारण पुलिस व्यवस्था को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं कर सकी। शहर के मुख्य सड़क पर गाड़ी-गाड़ी जले, और कई घरों की छतें धुंधली धुएँ से ढँक गईं। बेलफ़ास्ट की सार्वजनिक प्रशासनिक अधिकारियों ने इस हंगामे को रोकने के लिए आपातकालीन उपाय किए, लेकिन जनता के बीच का तनाव बढ़ते ही नजर आया। कई नागरिकों ने सुरक्षा के लिए अपने घरों को ही बंद कर रखा, जबकि कुछ ने अपने सामान को सुरक्षित रखने के लिए गुप्त स्थानों पर छिपा लिया। इस बीच, विभिन्न सामाजिक संगठनों ने शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करके हिंसा के विरुद्ध आवाज़ उठाई, परन्तु भीड़भाड़ और आक्रामकता ने उन्हें भी बाधित कर दिया। इस घटना पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निंदा की जा रही है। कई राजनैतिक नेता और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस हिंसा को 'मानवता के विरुद्ध अपराध' कहा है और तुरंत न्याय करने की मांग की है। विशेषज्ञों ने कहा है कि इस तरह की उग्रता को रोकने के लिए सामाजिक समावेशी नीतियों और शैक्षिक अभियानों को मजबूती से लागू करना आवश्यक है। अंततः, बेधड़क हिंसा को सख़्त दंड के साथ समाप्त किया जाना चाहिए, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं दोबारा न दोहराई जाएँ।