जैसे ही इज़राइल ने इरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू किए, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने इरान के राष्ट्रपति इरान ने ख़लीली (इरान) को एक स्पष्ट संदेश भेजा – "बहुत हो गया, अब वार्ता के लिए वापस आएँ"। यह बयान कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अनजाने में टुटे हुए शांति संबंधों को फिर से जोड़ने की कोशिश के रूप में देखा गया। ट्रम्प ने कहा कि इज़राइल की कार्रवाई ने क्षेत्र में तनाव को और भी बढ़ा दिया है और अब सभी पक्षों को बातचीत का रास्ता चुनना चाहिए। उन्होंने इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी चेतावनी दी कि उन्हें इरान के साथ समझौते को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। इस बीच इरान ने भी अपना प्रतिकार जारी रखा, दोनों देशों के बीच हवाई हमले और प्रतिक्रिया में वायुदीप्ति के घातक दायरे में एक और दिन बीता। इरान और इज़राइल के बीच लड़ाई अब 101वें दिन तक पहुँच चुकी थी, जिसमें दोनों पक्ष ने लगातार वायुमार्ग में हवाई हमलों का आदान-प्रदान किया। इज़राइल के कड़े जेट्स ने इरानी रक्षा बुनियादी ढाँचे पर कई बार बमबारी की, जबकि इरान ने भी इज़राइल के ठिकानों को निशाना बनाकर प्रत्युत्तर दिया। इस विंध्यात्मक झड़प के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने इज़राइल को एक बार फिर चेतावनी दी कि वे इरान के खिलाफ कोई भी बड़े पैमाने पर हमला न करें, क्योंकि यह शांति प्रक्रिया को नुकसान पहुँचा सकता है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिकी सरकार इरान के साथ एक समझौता हासिल करने के करीब है, और यदि दोनों पक्ष वार्ता के रास्ते पर चलें तो इस क्षेत्र में संभावित युद्ध को रोका जा सकता है। उनका मानना है कि इज़राइल को इरान के साथ राजनीतिक समाधान खोजने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए, न कि निरंतर सैन्य संघर्ष में डूबना चाहिए। अंत में, राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया की बड़ी ताकतों को मिलकर इस तनाव को कम करना चाहिए और मध्य पूर्व के स्थिरता के लिए एक संगठित रणनीति तैयार करनी चाहिए। निष्कर्षतः, इज़राइल की हवाई हमले और इरान की प्रतिकारी कार्रवाई के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प का इरान को वार्ता के लिए वापस बुलाने का आह्वान एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत देता है। यदि सभी पक्ष इस संकेत को समझ कर शांति की दिशा में कदम रखें, तो इस क्षेत्र में चल रहे अनिश्चितता और हिंसा को कम करने की आशा बनी रहती है।