राजनीतिक माहौल में आज अत्यधिक तनाव के साथ प्रश्न उठ रहा है कि क्या पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाएगा। राज्य की मौजूदा मुख्यमंत्री, ममता बनर्जी, ने बार-बार बताया है कि वह इस्तीफा नहीं देंगी और उन्होंने अपनी सरकार को लेकर कोई भी प्रश्न नहीं मानेंगे। यह दृढ़ता न केवल उनके समर्थकों के लिए आश्वासन बनी है, बल्कि विपक्ष तथा केन्द्र सरकार के लिये भी नई चुनौतियों का रूप ले रही है। वर्तमान में राज्यसभा में विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को उठाते हुए, यदि मुख्यमंत्री इस्तीफा देती हैं तो राष्ट्रपति शासन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, इसका संकेत दिया है। ममता बनर्जी ने हालिया चुनाव में अपने दल की हार को ‘धोखा’ और ‘ईवीएम की असामान्य बैटरी लेवल’ के रूप में तिरस्कार किया। वह यह भी कह रही हैं कि चुनावी परिणामों में हेरफेर की साजिशें रची गई थीं, जिसके कारण उनका मंत्रिमंडल अस्थायी रूप से हटाया गया। इस दिशा में उन्होंने कई प्रमुख राष्ट्रीय वादियों को भी चुनौती दी है और कहा है कि उनका इस्तीफा उत्तरदायी नहीं होगा। इस बीच, केंद्रीय सरकार ने कहा है कि यदि मुख्यमंत्री का इस्तीफा नहीं मिलता तो भी राष्ट्रपति शासन का विकल्प हमेशा खुला रहता है, क्योंकि संविधान में यह प्रावधान मौजूद है। पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह स्थिति कई बार देखी गई है, परन्तु इस बार स्थिति अधिक संवेदनशील दिख रही है क्योंकि राज्य के राजनीतिक संतुलन में भारी बदलाव आया है। विपक्षी नेताओं ने इस पर तीखा रुख अपनाते हुए, ‘उन्हें बाहर निकालो’ की मांग की है और यह बहस राष्ट्रीय स्तर पर भी तेज हो रही है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि राज्य में प्रशासनिक अस्थिरता बनी रहती है तो राष्ट्रपति शासन को लागू करने की संभावना बढ़ेगी, जिससे राज्य की स्वायत्तता पर प्रश्न उठेंगे। अंत में कहा जा सकता है कि ममता बनर्जी की दृढ़ता ने इस राजनीतिक संकट को और लम्बा कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने चुनाव में हारे नहीं, बल्कि झूठे आरोपों से बचाव किया है और अब वह किसी भी प्रकार के दबाव को सहेंगे नहीं। लेकिन इस दृढ़ता के साथ ही राष्ट्रपति शासन की संभावनाएं भी लगातार बनती जा रही हैं, जिससे राज्य में प्रशासनिक ढाँचा और लोकतांत्रिक प्रक्रियाएँ परख में आ रही हैं। आगे का विकास यह तय करेगा कि क्या पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू होगा या फिर राजनीतिक जटिलताओं के बीच मौजूदा सरकार को ही बरकरार रखा जाएगा।