वेस्ट बंगाल में आज आदरभरे धूमधाम से दोपहर के बाद से गठित विधानसभा चुनावों की गिनती शुरू हुई है। जैसा कि अपेक्षित था, कई पक्षों के प्रतिनिधि और मतदाता इस परिणाम की प्रतीक्षा में बेताब हैं। लेकिन इस महत्वपूर्ण चरण में प्रदेश की असमिया के राज्यमुखिया ममता बनर्जी ने एक सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि गिनती शुरू होने से कुछ ही घंटे पहले कई स्थानों पर अनपेक्षित बिजली कटौती और सीसीटीवी कैमरों का बंद होना हुआ है, जिससे टालमटोल की आशंका बढ़ी है। इस घटना को वह सीधे भारतियों के राष्ट्रवादी पार्टी (बीजेपी) से जोड़ रही हैं, और कथित तौर पर रिपोर्टेड निरंकुश कार्यों को लेकर सवाल उठाया है। ममता ने इंट्रानेट तथा सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों को चेतावनी दी कि इस तरह की तकनीकी अड़चनें चुनावी प्रक्रिया को बाधित कर सकती हैं, और इस कारण से अधिवक्ता दल और गणतांत्रिक संस्था को सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि सभी मौजूदा गिनती केंद्रों पर इलेक्ट्रिकल सप्लाई को स्थिर रखना जरूरी है, क्योंकि बटवारे के दौरान विघटित छवियों और ध्वनि रिकॉर्डिंग्स से मतगणना की पारदर्शिता को नुक़सान पहुंच सकता है। इस सूचना के बाद कई अनुशासनहीन राजनेता और टीवी चैनलों ने इन आरोपों पर पूछताछ शुरू कर दी, जबकि विपक्षी दल के महाप्रभारी कई क्षेत्रों में निरीक्षण टीम भेजने की घोषणा कर रहे हैं। ब्यूरो ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड एन्क्रिप्शन (ईसीआई) ने भी बताया कि वर्तमान समय में सभी सुरक्षा कैमरे और इलेक्ट्रिकल उपकरणों की स्थिति की रेगुलर मॉनिटरिंग की जा रही है। लेकिन ममता ने इस मौखिक बयान के साथ ही अपने मतदाता समूह को समर्थन की अपील की। उन्होंने कहा, "जैसे ही सूरज ढलेगा, हमें सही परिणाम दिखेंगे, इसलिए अपनी ज़िम्मेदारी समझकर गिनती केंद्रों में बने रहें और बाहर नहीं जावें"। इस प्रकार, उन्होंने अपने पार्टी के उम्मीदवारों और स्वयंसहायकों को दृढ़ रहने की प्रेरणा दी, और कहा कि यह समय है जब जनसंख्या की आवाज़ का सम्मान होना चाहिए। एनालिस्टों का मानना है कि इस तरह के आरोप चुनावी माहौल को तनावपूर्ण बना सकते हैं, परन्तु यह भी सच्चाई है कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। कई नागरिक संगठन आगे बढ़कर यह मांग कर रहे हैं कि उपर्युक्त समस्याओं का समाधान जल्द से जल्द किया जाये और गिनती के दौरान कोई भी तकनीकी त्रुटि को रोका जाये। अंततः, इस चुनावी संघर्ष का परिणाम जनता के हाथों में ही तय होगा, परन्तु सभी पक्षों को चाहिए कि वे शांति, शांतिपूर्ण संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के प्रति सम्मान कायम रखें।