Kotputli News
संस्कृति एवं मेले

वर्ष 1761 में मेवाड़ से जयपुर कैसे पहुंचे मोतीडूंगरी गणेश, जानिए मंदिर का इतिहास

जयपुर का प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर वर्ष 1761 में अपनी स्थापना के बाद से ही श्रद्धालुओं की अस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। तत्कालीन राजा सवाई माधोसिंह इस पावन प्रतिमा को मेवाड़ के मावली से जयपुर लेकर आए थे। बुधवार के दिन यहां विशेष भीड़ उमड़ती है जहां

K
Kotputli News प्रकाशित: 14 Sep 2026, 08:31 AM
⏱ 4 मिनट का समय 👁 5 बार देखा गया
यह समाचार अंग्रेजी में भी उपलब्ध है: Read in English →
वर्ष 1761 में मेवाड़ से जयपुर कैसे पहुंचे मोतीडूंगरी गणेश, जानिए मंदिर का इतिहास
वर्ष 1761 में मेवाड़ से जयपुर कैसे पहुंचे मोतीडूंगरी गणेश, जानिए मंदिर का इतिहास फोटो आभार: News18 Rajasthan State Wire
समाचार सुनें

0:00 / ~4:00
शेयर करें: 3 शेयर
WhatsApp Facebook

जयपुर का मोतीडूंगरी गणेश मंदिर गुलाबी नगरी के प्रथम आराध्य श्रीगणेश के प्रमुख और अतिसंवेदनशील धार्मिक केंद्रों में शुमार है। गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर यहां देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन और वंदना के लिए पहुंचते हैं। यह पवित्र स्थल न केवल जयपुर बल्कि संपूर्ण राजस्थान की धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर का एक अहम हिस्सा है, जहां हर वर्ग के लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।

इस ऐतिहासिक मंदिर की स्थापना का इतिहास वर्ष 1761 से जुड़ा हुआ है, जो जयपुर के प्राचीन और समृद्ध अतीत को रेखांकित करता है। मंदिर के उद्गम की यह कहानी बेहद रोचक है और यह जयपुर के तत्कालीन राजा सवाई माधोसिंह के शासनकाल से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है। राजा सवाई माधोसिंह के संरक्षण और प्रयासों के परिणामस्वरूप ही भगवान गणेश की यह अलौकिक प्रतिमा जयपुर की धरा पर स्थापित हो सकी थी।

ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार, जयपुर के तत्कालीन राजा सवाई माधोसिंह इस पावन प्रतिमा को मेवाड़ क्षेत्र के मावली से विशेष रूप से जयपुर लेकर आए थे। वर्ष 1761 में इस मंदिर की स्थापना के बाद से ही यहां नियमित पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला अनवरत रूप से चल रहा है। राजा द्वारा मेवाड़ से लाई गई यह प्रतिमा आज जयपुर के नागरिकों के लिए अटूट श्रद्धा और विश्वास का केंद्र बिंदु बनी हुई है।

वर्तमान समय में मंदिर की जमीनी हकीकत यह है कि यहां प्रतिदिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, विशेषकर बुधवार के दिन मंदिर में भारी भीड़ देखने को मिलती है। लोग किसी भी नए वाहन की खरीद, नए व्यापार की शुरुआत या किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के आरंभ से पहले विघ्नहर्ता गणेशजी का आशीर्वाद लेने अवश्य पहुंचते हैं। मंदिर परिसर में अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मन्नत का धागा बांधने की प्राचीन परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

इस मंदिर का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक प्रभाव जयपुर के साथ-साथ कोटपुतली-बहरोड़ सहित आसपास के सभी जिलों पर भी व्यापक रूप से पड़ता है। क्षेत्रीय ग्रामीण और शहरी इलाकों से लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर नियमित रूप से इस पवित्र धाम की यात्रा करते हैं, जिससे आपसी सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव को भी मजबूती मिलती है। यह मंदिर क्षेत्र के धार्मिक पर्यटन और जनमानस की आस्था का एक प्रमुख स्तंभ है।

मंदिर प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए निरंतर विशेष प्रबंध किए जाते हैं। साप्ताहिक मेलों और विशेष पर्वों के दौरान सुरक्षा, यातायात नियंत्रण और अनुशासन बनाए रखने के लिए पुख्ता प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है ताकि दर्शनार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

भविष्य की योजनाओं और दृष्टिकोण को देखते हुए मंदिर समिति ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण के साथ-साथ आने वाले भक्तों के लिए सुविधाओं के विस्तार पर लगातार कार्य कर रही है। वर्ष 1761 में राजा सवाई माधोसिंह द्वारा शुरू की गई यह परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है और आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था का यह महान केंद्र निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करता रहेगा।

विज्ञापन Apex Defense Academy Behror Admissions
प्रायोजित

Admissions Open: NDA, Air Force, Navy & Police Training Academy

Join the premier defense residential academy in Behror. Free demo classes this Sunday.

संबंधित खबरें

संस्कृति एवं मेले 14 Sep 2026

तालाब में मटका हिलाते हैं भाई-बहन, फिर पिलाते हैं एक-दूसरे को पानी... जालौर की ये परंपरा क्यों है खास?

कोटपूतली-बहरोड़ जिले में जनहित और क्षेत्रीय प्राथमिकताओं को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसके तहत स्थानीय स्तर पर आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों के दलों ने विभिन्न उपखंडों का दौरा कर बुनियादी सुविधाओं, विकास कार्यों की प्रगति और...

⏱ 1 मिनट का समय 👁 2
संस्कृति एवं मेले 14 Sep 2026

ऋतुराज राठौड़ को मिला प्रतिष्ठित बॉलीवुड पुरस्कार, पाली में गर्व की लहर

पाली, राजस्थान की प्रतिभाशाली अभिनेत्री ऋतुराज राठौड़ ने बॉलीवुड मंच पर एक प्रतिष्ठित पुरस्कार प्राप्त किया, जिससे स्थानीय कला प्रेमियों में उमंग की लहर दौड़ गई। यह सम्मान उनके अभिनय और सांस्कृतिक योगदान को मान्यता देता है और क्षेत्र के नवोदित कलाकारों के

⏱ 4 मिनट का समय 👁 2
संस्कृति एवं मेले 08 Sep 2026

बहरोड़: खाटू श्याम जी फाल्गुनी पदयात्रा के लिए कोटपूतली हाईवे पर लगे भव्य सेवा व जलपान शिविर

बहरोड़ क्षेत्र में खाटू श्याम जी फाल्गुनी पदयात्रा के लिए कोटपूतली हाईवे पर लगे भव्य सेवा व जलपान शिविर को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां व कार्ययोजना शुरू, नागरिकों और संबंधित पक्षों में उत्साह।

⏱ 3 मिनट का समय 👁 1,081
संस्कृति एवं मेले 08 Sep 2026

नीमराना: पारंपरिक गणगौर और तीज महोत्सव पर कोटपूतली नगर में निकाली गई भव्य शाही सवारी

नीमराना क्षेत्र में पारंपरिक गणगौर और तीज महोत्सव पर कोटपूतली नगर में निकाली गई भव्य शाही सवारी को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारियां व कार्ययोजना शुरू, नागरिकों और संबंधित पक्षों में उत्साह।

⏱ 3 मिनट का समय 👁 2,581
K
कोटपूतली न्यूज़ ऐप इंस्टॉल करें

फास्ट लोडिंग व मोबाइल ऐप अनुभव

🍪

हम बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव, विश्लेषण और प्रासंगिक विज्ञापनों (Google AdSense) के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं। गोपनीयता नीति पढ़ें

Success