अलवर स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सोमवार को एक गंभीर प्रशासनिक और अनुशासनात्मक संकट पैदा हो गया, जब आक्रोशित विद्यार्थियों ने छात्र कल्याण कोष के विवादित उपयोग और लंबे समय से लंबित विभिन्न मांगों को लेकर जोरदार आंदोलन शुरू कर दिया।
इस अभूतपूर्व प्रदर्शन की जड़ें पिछले कई महीनों से विद्यार्थियों के बीच सुलग रहे असंतोष में टटोली जा सकती हैं, जो प्रशासन की अपारदर्शी वित्तीय नीतियों, विशेष रूप से छात्र कल्याण और शैक्षणिक संवर्धन के लिए निर्धारित कोष के आवंटन और उपयोग को लेकर था।
सोमवार सुबह तनाव उस समय चरम पर पहुंच गया जब विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से यह महसूस किया कि बातचीत के प्रयास विफल हो चुके हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्होंने अलवर स्थित विशाल मेडिकल कॉलेज और अस्पताल परिसर के मुख्य द्वार पर ताला जड़ दिया।
अपनी तीव्र नाराजगी व्यक्त करते हुए प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने कॉलेज डीन की कार्यशैली और प्रशासनिक दृष्टिकोण पर खुले तौर पर सवाल उठाए, और उच्च पदस्थ अधिकारी पर एकतरफा निर्णय लेने तथा विद्यार्थियों की बुनियादी शैक्षणिक आवश्यकताओं की उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाया।
मुख्य द्वार पर की गई इस तालाबंदी के कारण संस्थान के सामान्य कामकाज, रोगी सेवा समन्वय और प्रशासनिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गईं, जिससे क्षेत्रीय स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र से जुड़े मरीजों और आगंतुकों का ध्यान आकर्षित हुआ।
बढ़ते तनाव को देखते हुए वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और सुरक्षा कर्मियों ने छात्र प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू करने का प्रयास किया और उनसे आग्रह किया कि वे तालाबंदी समाप्त कर अपनी मांगों का एक औपचारिक ज्ञापन आधिकारिक समीक्षा के लिए सौंपें।
चूंकि विद्यार्थी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं और संस्थान में संरचनात्मक सुधार तथा वित्तीय पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, ऐसे में शैक्षणिक हलकों और स्थानीय पर्यवेक्षकों की निगाहें इस प्रमुख चिकित्सा संस्थान में स्थिति सामान्य करने के लिए प्रशासनिक कदमों पर टिकी हुई हैं।