राजस्थान में नवंबर का दूसरा सप्ताह शुरू होने के बावजूद सर्दी का असर अभी तेज नहीं हुआ है और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम पूरी तरह शुष्क बना हुआ है। दिन के समय तेज धूप खिलने के कारण प्रदेशवासियों को गर्मी का अहसास हो रहा है, जिससे पारंपरिक रूप से इस महीने महसूस होने वाली ठंडक गायब है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के ताजा आंकड़ों के अनुसार, फिलहाल पूरे राज्य में वायुमंडलीय परिस्थितियां स्थिर बनी हुई हैं और आगामी दिनों तक मौसम के मिजाज में किसी बड़े बदलाव के संकेत नहीं मिल रहे हैं।
क्षेत्रीय जलवायु परिवर्तन के ऐतिहासिक संदर्भ का विश्लेषण करें तो वर्तमान में दिन के समय गर्मी का बने रहना, उत्तर-मानसून की विदाई के बाद सर्दियों के आगमन में होने वाली सामान्य देरी का हिस्सा है। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार नवंबर के शुरुआती दिनों में ही संध्याकालीन ठंडक और सुबह की हल्की सिहरन गायब है, जिसका मुख्य कारण उत्तर-पश्चिम भारत में बने उच्च दाब के क्षेत्र हैं। इन मौसमी दशाओं के चलते सूर्य की किरणें सीधे तौर पर जमीन को प्रभावित कर रही हैं, जिससे तापमान तय समय से अधिक बना हुआ है।
मौसम विभाग द्वारा जारी किए गए जमीनी आंकड़ों और सांख्यिकीय रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार को बाड़मेर में सर्वाधिक अधिकतम तापमान 37.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के लिहाज से काफी अधिक माना जा रहा है। उदयपुर, कोटा, जयपुर और जोधपुर सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख संभागों और जिलों में भी तापमान का पारा सामान्य से ऊपर चल रहा है। इन इलाकों में दोपहर के वक्त कड़ी धूप के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है और लोगों को पसीने छुड़ाने वाली गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय बाजारों के व्यापारियों, दुकानदारों और आम नागरिकों ने लंबी खींचती गर्मी पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि गर्म कपड़ों और सर्दियों के सामान की बिक्री पर इसका विपरीत असर पड़ा है। व्यापारियों का कहना है कि हर साल नवंबर के पहले सप्ताह तक सर्दियों की खरीदारी जोर पकड़ लेती थी, लेकिन तापमान में गिरावट न होने के कारण इस बार बाजार में अपेक्षित रौनक नदारद है। ग्रामीण और शहरी इलाकों के लोग लगातार मौसम में बदलाव और ठंडक के अहसास का इंतजार कर रहे हैं ताकि दैनिक गतिविधियों में राहत मिल सके।
कोटपूतली-बहरोड़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के स्थानीय आर्थिकी, कृषि और जनजीवन पर इस विलंबित सर्दी का मिलाजुला असर देखने को मिल रहा है। रबी की फसलों की बुवाई में जुटे किसान मिट्टी की नमी और तापमान पर पैनी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि दिन की तेज धूप के कारण खेतों की नमी जल्दी सूख रही है। कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन आपसी समन्वय के साथ किसानों को उचित सिंचाई प्रबंधन और समय पर फसलों की देखभाल के लिए लगातार जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर रहे हैं।
प्रशासनिक स्तर पर भी मौसम विभाग की गतिविधियों और चेतावनियों पर पैनी नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित मौसमी बदलाव से निपटने के लिए तैयारियां पूरी रहें। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर द्वारा नियमित रूप से अपडेट जारी किए जा रहे हैं, जिन्हें जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के साथ साझा किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने भी विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए सलाह जारी की है ताकि दिन की तेज गर्मी और आने वाले दिनों में संभावित तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
आगामी एक सप्ताह के मौसम के पूर्वानुमान को देखें तो अगले 3 से 4 दिनों तक तापमान में किसी भी बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं और मौसम शुष्क बना रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक आगामी 10 नवंबर से एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करने वाला है, हालांकि इसका राजस्थान पर फिलहाल कोई बड़ा प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। इस पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद जब उत्तर-पश्चिमी हवाओं का प्रभाव राज्य में बढ़ेगा, तब तापमान में क्रमिक गिरावट दर्ज की जाएगी और प्रदेश में धीरे-धीरे सर्दी का असली असर शुरू होने की उम्मीद है।