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पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने चांगवोन में जीते सिल्वर और गोल्ड, 2028 पैरालंपिक का कोटा किया पक्का

भारतीय पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने दक्षिण कोरिया के चांगवोन में आयोजित पैरा वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में 10 मीटर एयर राइफल एसएच1 स्टैंडिंग इवेंट में सिल्वर और टीम इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। इस शानदार उपलब्धि के साथ वह 2028 पैरालंपिक

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Kotputli News प्रकाशित: 22 Sep 2026, 03:30 PM
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पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने चांगवोन में जीते सिल्वर और गोल्ड, 2028 पैरालंपिक का कोटा किया पक्का
पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने चांगवोन में जीते सिल्वर और गोल्ड, 2028 पैरालंपिक का कोटा किया पक्का फोटो आभार: News18 Rajasthan State Wire
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भारतीय खेल जगत के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ते हुए शीर्ष पैरा शूटर मोना अग्रवाल ने दक्षिण कोरिया के चांगवोन में आयोजित पैरा वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप 2026 में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन का लोहा मनवाया है। इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता के 10 मीटर एयर राइफल एसएच1 स्टैंडिंग इवेंट में शानदार सिल्वर मेडल और टीम इवेंट में स्वर्ण पदक हासिल कर उन्होंने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। यह अभूतपूर्व सफलता न केवल उनके व्यक्तिगत पदकों के सफर में एक नया आयाम जोड़ती है, बल्कि उन्हें 2028 पैरालंपिक का कोटा हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज भी बनाती है।

मोना अग्रवाल के इस खेल सफर के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संघर्षों पर नजर डालें तो उनकी यह प्रगति बेहद प्रेरणादायक रही है। उन्होंने वर्ष 2021 में अपने पेशेवर खेल करियर की शुरुआत की थी और बहुत कम समय में अपनी कड़ी मेहनत के बल पर राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान बनाई। उनकी इस असाधारण यात्रा का सबसे बड़ा पड़ाव पेरिस 2024 पैरालंपिक रहा, जहां उन्होंने अपने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया था। फ्रांस की राजधानी में मिली उस ऐतिहासिक सफलता ने उन्हें वैश्विक मंच पर एक मजबूत दावेदार के रूप में स्थापित कर दिया था।

चांगवोन में आयोजित इस प्रतियोगिता की तकनीकी बारीकियों और मुकाबलों की बात करें तो वहां का माहौल बेहद चुनौतीपूर्ण था, जिसमें दुनिया भर के शीर्ष निशानेबाजों ने हिस्सा लिया। 10 मीटर एयर राइफल एसएच1 स्टैंडिंग वर्ग में मोना ने मानसिक दृढ़ता और अचूक निशानेबाजी का परिचय देते हुए सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही टीम इवेंट में उनके उत्कृष्ट योगदान ने भारतीय दल को स्वर्ण पदक दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। दक्षिण कोरिया की इस धरती पर हासिल की गई यह सफलता उनकी तकनीकी दक्षता और मानसिक मजबूती का प्रत्यक्ष प्रमाण है।

इस उल्लेखनीय सफलता के पीछे जयपुर के प्रतिष्ठित कोच योगेश शेखावत का अमूल्य मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण मुख्य स्तंभ रहा है। कोच शेखावत की देखरेख में मोना ने खेल की तमाम बारीकियों, पॉश्चर और सटीक निशाने की कला को परिष्कृत किया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि एक कुशल कोच और समर्पित खिलाड़ी का यह समन्वय ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने की संभावनाओं को प्रबल करता है। स्थानीय खेल प्रेमियों और प्रशासनिक हलकों में इस सफलता को लेकर अत्यधिक उत्साह का माहौल है।

मोना अग्रवाल की इस ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रभाव कोटपूतली-बहरोड़ जिले सहित पूरे राजस्थान क्षेत्र पर गहराई से पड़ रहा है। ग्रामीण और क्षेत्रीय स्तर के युवा खिलाड़ियों के लिए मोना एक जीवंत प्रेरणा स्रोत बन चुकी हैं। उनकी यह सफलता साबित करती है कि दृढ इच्छाशक्ति और सही मार्गदर्शन से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। क्षेत्रीय खेल अकादमियों और युवा वर्ग में खेलकूद के प्रति रुचि तेजी से बढ़ रही है, जिससे भविष्य में क्षेत्र से और भी प्रतिभावान खिलाड़ियों के उभरने की उम्मीद बंधती है।

प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि शीर्ष खिलाड़ियों को निरंतर उन्नत खेल सुविधाएं, अत्याधुनिक प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता मिलती रहे। खेल प्रशासकों का यह दायित्व है कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण शिविरों के लिए खिलाड़ियों को किसी भी प्रकार की प्रशासनिक या साजो-सामान संबंधी असुविधा का सामना न करना पड़े, ताकि वे पूरी तरह से अपने खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकें।

भविष्य की रणनीतियों और आगामी योजनाओं की चर्चा करते हुए मोना अग्रवाल का अगला और सबसे बड़ा लक्ष्य 2028 पैरालंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है। चांगवोन में कोटा पक्का होने के बाद अब उनके पास अपनी तैयारियों को और अधिक धार देने के लिए पर्याप्त समय है। कोच योगेश शेखावत के मार्गदर्शन में एक सुनियोजित और दीर्घकालिक प्रशिक्षण योजना पर काम शुरू कर दिया गया है, ताकि देश की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए पैरालंपिक के सर्वोच्च शिखर पर तिरंगा फहराया जा सके।

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