जयपुर में निकाय चुनाव अगले सप्ताह शुरू होने वाले हैं, और जिला निर्वाचन अधिकारी संदेश नायक ने स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि मतदाता वोटर आईडी कार्ड न होने पर मतदान से वंचित नहीं किए जाएंगे। नई दिशा‑निर्देशों के तहत, ग्यारह मान्य फोटो‑पहचान दस्तावेज़ों में से कोई एक, जो चुनाव सूचना की तिथि से पहले जारी हुआ हो, मतदान केंद्र पर पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
यह नीति परिवर्तन भारत में मतदान के लिए केवल वोटर आईडी को ही पहचान प्रमाण मानने के लंबे समय से चल रहे विवाद से उत्पन्न हुआ है। ऐतिहासिक रूप से, निर्वाचन आयोग ने मतदान के लिए वोटर आईडी को एकमात्र प्रमाणपत्र के रूप में अनिवार्य किया था, जिससे कभी‑कभी उन नागरिकों को मतदान से बाहर कर दिया जाता था जिन्होंने अपना कार्ड खो दिया या कभी प्राप्त नहीं किया। पिछले दशक में कानूनी चुनौतियों और नागरिक समाज के दबाव ने अधिकारियों को स्वीकार्य दस्तावेज़ों की सूची को विस्तृत करने के लिए प्रेरित किया, और अंततः आज की समावेशी रूपरेखा तैयार हुई।
अब मान्य ग्यारह दस्तावेज़ों में शामिल हैं: आधार कार्ड, वोटर‑आईडी (उनके लिए जो पहले से रखते हैं), बैंक या डाकघर का फोटो‑पासबुक, स्वास्थ्य बीमा स्मार्ट कार्ड या आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, भारतीय पासपोर्ट, फोटो‑पेंशन दस्तावेज़, सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र की सेवा पहचान पत्र, सांसदों एवं विधायकों को जारी पहचान पत्र, तथा यू‑डी‑आईडी कार्ड। प्रत्येक दस्तावेज़ में स्पष्ट फोटो होना अनिवार्य है और वह मूल होना चाहिए, न कि फ़ोटोकॉपी या डिजिटल प्रिंट। साथ ही, दस्तावेज़ का जारी करने की तिथि निकाय चुनाव की सार्वजनिक सूचना जारी होने की तिथि से पहले होनी चाहिए, ताकि केवल चुनाव हेतु नए दस्तावेज़ बनवाने की संभावना समाप्त हो सके।
जिला निर्वाचन अधिकारी संदेश नायक ने इस लचीलापन के महत्व पर बल देते हुए कहा, “हम सभी योग्य मतदाताओं से अनुरोध करते हैं कि वे सूचीबद्ध में से कोई एक मूल दस्तावेज़ मतदान केंद्र पर लेकर आएँ। हमारा प्राथमिक लक्ष्य मतदान प्रक्रिया को यथासंभव सुलभ बनाना है, साथ ही निर्वाचन सूची की सत्यता को बनाए रखना है।” जयपुर नागरिक फ़ोरम जैसी स्थानीय एनजीओ ने इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि कई वरिष्ठ नागरिक और प्रवासी कामगार अक्सर अपने वोटर आईडी को अद्यतन रखने में कठिनाई का सामना करते हैं। फिर भी कुछ राजनीतिक विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि विभिन्न प्रकार के दस्तावेज़ों की स्वीकृति से मतदान कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ सकता है, क्योंकि उन्हें सीमित समय में अधिक प्रकार की पहचान की जाँच करनी पड़ेगी।
यह निर्देश जयपुर से उत्पन्न हुआ है, परंतु इसका प्रभाव पड़ोसी कोटपूतली‑बहरौर जिले में भी महसूस किया जा रहा है, जहाँ कई निवासी काम, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए राजधानी की ओर यात्रा करते हैं। कोटपूतली के वे लोग जो ऊपर सूचीबद्ध किसी भी दस्तावेज़ के धारी हैं, अब बिना किसी असुविधा के जयपुर के निकाय चुनाव में मतदान कर सकते हैं। इससे जिले के प्रवासी जनसंख्या की भागीदारी में वृद्धि की संभावना है, विशेषकर उन वार्डों में जहाँ सीमावर्ती क्षेत्रों की जनसंख्या मिश्रित है और मतदान परिणामों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है।
नयी व्यवस्था को लागू करने के लिये चुनाव प्रबंधन ने बहु‑आयामी जागरूकता अभियान चलाया है। हिंदी और अंग्रेजी दोनों में जानकारी पत्रक समुदाय केन्द्रों, बैंकों और डाकघर में वितरित किए जा रहे हैं। मतदान कर्मचारियों के लिये प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए हैं, जिसमें ग्यारह दस्तावेज़ों की पहचान, नकली दस्तावेज़ों की जाँच और मतदाताओं के प्रश्नों के उत्तर देना शामिल है। इसके अतिरिक्त, एक हेल्पलाइन स्थापित की गई है, जहाँ वरिष्ठ निर्वाचन अधिकारी वास्तविक‑समय में दस्तावेज़ की पात्रता संबंधी प्रश्नों का उत्तर देते हैं।
आगे की योजना के अनुसार, मतदान का पहला चरण 10 अक्टूबर को निर्धारित है, जिसके बाद क्रमिक चरणों में मतदान जारी रहेगा। अधिकारी आशावादी हैं कि विस्तारित पहचान दस्तावेज़ों के कारण मतदान प्रक्रिया सुगम होगी, कतारें कम होंगी और विशेषकर हाशिए के समूहों की भागीदारी बढ़ेगी। चुनाव के बाद एक विस्तृत समीक्षा की जाएगी, जिससे यह निर्धारित किया जाएगा कि इस प्रकार की लचीलापन नीति को राजस्थान के अन्य निकाय चुनावों में स्थायी रूप से लागू किया जाए या नहीं।