राजधानी जयपुर के अंतर्गत साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच दो अलग-अलग घटनाओं में कुल पांच लाख छہहत्तर हजार नौ सौ पच्चीस रुपये की ठगी का गंभीर मामला सामने आया है। इस सुनियोजित डिजिटल अपराध ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। संगठित साइबर गिरोह लगातार नई तकनीकों और डराने-धमकाने के तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल रहे हैं।
इस प्रकार की ठगी की पृष्ठभूमि और उद्गम को देखें तो अपराधी अब भोले-भाले नागरिकों को मनोवैज्ञानिक रूप से आतंकित करने की रणनीति अपना रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से साइबर अपराधियों ने साधारण लॉटरी और इनाम के प्रलोभन से आगे बढ़कर पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और सुरक्षा बलों के फर्जी अधिकारी बनकर लोगों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील मामलों का भय दिखाकर वे पीड़ितों को सोचने का मौका नहीं देते हैं।
जमीनी हकीकत और वित्तीय नुकसान के आंकड़ों पर गौर करें तो इस पूरी घटना में कुल पांच लाख छतहत्तर हजार नौ सौ पच्चीस रुपये की ठगी हुई है। विशेष रूप से चौमूं थाना क्षेत्र के अंतर्गत एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है जहां जालसाज ने खुद को विशेष कार्य बल यानी एसटीएफ का अधिकारी बताया। इस ठग ने पीड़ित संतोष कुमार सिकलीगर को पुलवामा हमले में फर्जी सिम कार्ड के इस्तेमाल होने का झूठा और भयानक डर दिखाया, जिसके बाद उससे दो लाख सत्तर हजार रुपये ऐंठ लिए गए।
इस गंभीर मामले पर स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और विभिन्न हितधारकों की प्रतिक्रियाओं में भारी रोष और चिंता का माहौल देखा जा रहा है। आम जनता का कहना है कि जिस प्रकार से अपराधी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के नाम का दुरुपयोग कर रहे हैं, उससे समाज में असुरक्षा की भावना पैदा हो रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई अन्य नागरिक इस प्रकार के षड्यंत्र का शिकार न बने।
कोटपूतली-बहरोड जिले सहित पूरे क्षेत्रीय प्रशासनिक दायरे पर इस प्रकार के अपराधों का गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इस तरह की घटनाओं से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है बल्कि डिजिटल माध्यमों और संचार तंत्र के प्रति आम जनता का विश्वास भी डगमगाता है। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों के लोग अब अनजान फोन कॉल्स और डिजिटल लेनदेन को लेकर अत्यधिक सतर्कता बरतने पर मजबूर हो गए हैं।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया और वैधानिक निगरानी के तहत साइबर अपराध शाखा ने इन दोनों मामलों की गहन जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि देश का कोई भी कानून लागू करने वाला विभाग कभी भी फोन पर पैसों की मांग नहीं करता है और न ही इस प्रकार की धमकियां देता है। प्रशासन नागरिकों को लगातार जागरूक करने के लिए विभिन्न माध्यमों से दिशा-निर्देश जारी कर रहा है ताकि लोग किसी भी प्रकार के भय या दबाव में न आएं।
आगामी समय और भविष्य की कार्ययोजना को देखते हुए पुलिस विभाग इन मामलों की तह तक जाने के लिए विशेष टीमों का गठन कर रहा है। जनता की यही अपेक्षा है कि ठगी गई कुल पांच लाख छतहत्तर हजार नौ सौ पच्चीस रुपये की राशि को जल्द से जल्द बरामद किया जाए और दोषियों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाए। प्रशासन ने अपील की है कि किसी भी संदिग्ध फोन कॉल आने पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दी जाए।