लेक सिटी के रूप में विश्वभर में अपनी खास पहचान रखने वाला उदयपुर शहर सिर्फ अपने राजसी महलों, झीलों और शाही इतिहास के लिए ही नहीं जाना जाता, बल्कि इसके आंचल में प्राचीन ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें भी सुरक्षित हैं। शहर के विभिन्न हिस्सों में ऐसे कई प्राचीन स्थल मौजूद हैं जो सदियों पुरानी संस्कृति और धार्मिक आस्था की गहरी दास्तान बयां करते हैं। इन तमाम ऐतिहासिक धरोहरों के बीच शहर की सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने वाले कई धार्मिक केंद्र आज भी अपनी प्राचीनता के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
इसी कड़ी में उदयपुर के सवीना खेड़ा क्षेत्र में स्थित श्री पार्श्वनाथ भगवान का प्राचीन श्वेतांबर जैन मंदिर शहर के सबसे महत्वपूर्ण और श्रद्धा के केंद्रों में शुमार किया जाता है। यह भव्य एवं प्राचीन मंदिर न केवल जैन समाज बल्कि सम्पूर्ण धार्मिक समुदाय के लिए गहरी आस्था का प्रतीक बना हुआ है। सदियों से इस पावन स्थल पर लगातार धार्मिक अनुष्ठान और पूजा-अर्चना का क्रम अनवरत रूप से जारी है, जो इसकी जीवंतता को प्रमाणित करता है।
उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारियों और मान्यताओं के अनुसार, सवीना खेड़ा स्थित यह श्वेतांबर जैन मंदिर लगभग 2500 साल पुराना माना जाता है। इस अति प्राचीन मंदिर में भगवान पार्श्वनाथ की मनमोहक और अलौकिक प्रतिमा विराजमान है, जिसके दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु खिंचे चले आते हैं। इस मंदिर की प्राचीनता और वास्तुकला प्राचीन भारतीय शिल्पकला और धार्मिक निष्ठा का एक उत्कृष्ट और जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है।
इस मंदिर के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए रविंद्र जैन बताते हैं कि यह पावन मंदिर उदयपुर शहर के बसने से भी पहले का माना जाता है। यह तथ्य इस बात का परिचायक है कि आधुनिक शहर के अस्तित्व में आने से सदियों पहले भी यह क्षेत्र धार्मिक गतिविधियों और आध्यात्मिक साधना का एक प्रमुख केंद्र रहा है। समय के साथ शहर का विस्तार होता गया, परंतु इस प्राचीन मंदिर की महत्ता और श्रद्धालुओं की अटूट श्रद्धा में कभी कोई कमी नहीं आई।
सवीना खेड़ा क्षेत्र में स्थित इस ऐतिहासिक मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में अपनी हाजिरी लगाते हैं। मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही भक्तों को एक अलग ही प्रकार की आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अहसास होता है। यहां आने वाले श्रद्धालु पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ भगवान के दर्शन करते हैं तथा मंदिर के शांत वातावरण में बैठकर अपनी आराधना संपन्न करते हैं।
मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए नवकार मंत्र का स्मरण और जाप करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। श्रद्धालु यहां भगवान पार्श्वनाथ के दर्शन करने के पश्चात पवित्र नवकार मंत्र का जाप करते हैं और अपनी मनोकामनाएं उनके समक्ष रखते हैं। ऐसी दृढ़ मान्यता है कि जो भी भक्त सच्ची आस्था और पवित्र हृदय के साथ इस प्राचीन मंदिर में दर्शन करता है और नवकार मंत्र का स्मरण करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं अवश्य पूरी होती हैं।
आधुनिकता की अंधी दौड़ के बीच उदयपुर की यह प्राचीन धरोहर आज भी अपनी मूल गरिमा और अध्यात्म को संजोए हुए है। स्थानीय नागरिकों और प्रबंधकों का मानना है कि इस प्रकार के प्राचीन धार्मिक स्थलों का संरक्षण करना हमारी साझी संस्कृति को बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है। भगवान पार्श्वनाथ की कृपा और श्रद्धालुओं की अटूट आस्था के बल पर यह 2500 वर्ष पुराना मंदिर आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का प्रमुख स्रोत बना रहेगा।