Kotputli News
संस्कृति एवं मेले

उदयपुर के 451 वर्ष पुराने महालक्ष्मी मंदिर में सवा 8 लाख की पोशाक में सजीं माता, उमड़ा जनसैलाब

उदयपुर के ऐतिहासिक 451 साल पुराने महालक्ष्मी मंदिर में दीपावली पर तड़के 4 बजे से ही श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। माता महालक्ष्मी को सोने-चांदी से निर्मित सवा 8 लाख रुपये की विशेष पोशाक से अलंकृत किया गया। पूर्व राजपरिवार के लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ न

K
Kotputli News प्रकाशित: 08 Nov 2026, 05:30 PM
⏱ 3 मिनट का समय • 👁 1,014 बार देखा गया
यह समाचार अंग्रेजी में भी उपलब्ध है: Read in English →
उदयपुर के 451 वर्ष पुराने महालक्ष्मी मंदिर में सवा 8 लाख की पोशाक में सजीं माता, उमड़ा जनसैलाब
उदयपुर के 451 वर्ष पुराने महालक्ष्मी मंदिर में सवा 8 लाख की पोशाक में सजीं माता, उमड़ा जनसैलाब फोटो आभार: Amar Ujala Rajasthan Regional Wire
समाचार सुनें

0:00 / ~3:00
शेयर करें: 7 शेयर
WhatsApp Facebook

दीपावली के पावन पर्व पर राजस्थान के उदयपुर स्थित ऐतिहासिक महालक्ष्मी मंदिर में आस्था का विशाल जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के 4 बजे मंदिर के कपाट खुलते ही हजारों श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दर्शन के लिए लग गईं। इस विशेष अवसर पर माता महालक्ष्मी की प्रतिमा को सोने और चांदी के सूक्ष्म तारों से तैयार की गई सवा 8 लाख रुपये की भव्य पोशाक पहनाई गई, जो दिनभर श्रद्धालुओं के विशेष आकर्षण का केंद्र बनी रही।

उदयपुर का यह प्रसिद्ध महालक्ष्मी मंदिर लगभग 451 वर्ष पुराना है और इसका ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक महत्व अत्यंत व्यापक है। साढ़े चार शताब्दियों से अधिक समय से यह मंदिर दीपावली उत्सव के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित रहा है। सदियों पुरानी इस परंपरा के तहत हर वर्ष दीपावली पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जो राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का प्रतिनिधित्व करते हैं।

मंदिर में सुबह 4 बजे से शुरू हुए धार्मिक कार्यक्रमों के तहत सर्व प्रथम माता का विशेष अभिषेक और मंगल श्रृंगार किया गया। इसके पश्चात सवा 8 लाख रुपये मूल्य की सोने-चांदी की विशेष पोशाक धारण कराई गई। पोशाक की अद्भुत कारीगरी और अलौकिक भव्यता को निहारने के लिए भोर से ही मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए महालक्ष्मी के दर्शन किए।

इस पावन अवसर पर पूर्व राजपरिवार के सदस्य लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने भी अपने परिवार के साथ महालक्ष्मी मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना की। लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ और उनके परिजनों ने माता के चरणों में शीश नवाकर क्षेत्र तथा पूरे प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की प्रार्थना की। ऐतिहासिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए पूर्व राजपरिवार की उपस्थिति ने उत्सव की गरिमा को और बढ़ा दिया।

उदयपुर के इस भव्य आयोजन का सकारात्मक प्रभाव कोटपूतली-बहरोड़ सहित पूरे राजस्थान के धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण पर दिखाई देता है। दीपावली जैसे बड़े त्योहारों पर प्रमुख स्थलों पर उमड़ने वाली भीड़ न केवल आध्यात्मिक चेतना को बल देती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था, व्यापार और पर्यटन को भी नई ऊर्जा प्रदान करती है। पूजा सामग्री, फूलों और हस्तशिल्प से जुड़े कारोबारियों को इस दौरान बड़ा आर्थिक संबल मिलता है।

तड़के 4 बजे से उमड़ी भारी भीड़ को सुचारू रूप से नियंत्रित करने के लिए स्थानीय प्रशासन और मंदिर प्रबंधन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए थे। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुलभ दर्शन के लिए अलग-अलग बैरिकेडिंग और पंक्तियों की व्यवस्था की गई थी। पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवकों की टीम परिसर में मुस्तैद रही, जिससे बिना किसी व्यवधान के दर्शन प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।

महालक्ष्मी मंदिर में आयोजित यह भव्य पूजनोत्सव दीपावली पर्व की धार्मिक ऊर्जा को नई ऊंचाई प्रदान करता है। आने वाले दिनों में भी मंदिर में श्रद्धालुओं का आगमन बने रहने की संभावना है। 451 साल पुरानी यह पावन परंपरा राजस्थान की अटूट आस्था, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक सौहार्द की एक जीवंत मिसाल बनकर उभरी है।

Featured Creator Deep | @deepdrives.in
Deep | @deepdrives.in

📸 Deep | @deepdrives.in

🚗 Kotputli Ka Ladka • Car Creator

Real owner reviews, tested mileage & hidden car hacks! Join 10K+ automobile lovers.

K

Kotputli News

सत्यापित पत्रकार

कोटपूतली-बहरोड़ जिला संवाददाता एवं संपादकीय डेस्क

तथ्य-जांच सत्यापित

यह समाचार रिपोर्ट कोटपूतली न्यूज़ संपादकीय आचार संहिता के तहत प्रकाशित की गई है। यदि आपको इसमें कोई तथ्यात्मक त्रुटि प्रतीत हो तो सुधार हेतु संपर्क करें।

संबंधित खबरें

संस्कृति एवं मेले • 09 Nov 2026

बीकानेर में देवी लक्ष्मी को चीनी की मिठाइयां चढ़ाने की सदियों पुरानी परंपरा जीवित

बीकानेर में रियासतकाल से चली आ रही दीपावली पर महल-माळिया, बड़क-पापड़ी और इलायची मखाणा जैसी विशेष चीनी की मिठाइयों से लक्ष्मी पूजन की अनूठी परंपरा आज भी कायम है। ये मिठाइयां विशेष रूप से कारखानों में तैयार की जाती हैं और स्थानीय लोग इनके बिना लक्ष्मी पूजा

⏱ 4 मिनट का समय 👁 1,002
संस्कृति एवं मेले • 09 Nov 2026

जयपुर में दिवाली की भव्य रौनक, अमर जवान ज्योति पर बर्फ की प्रतिमाएं स्थापित

गुलाबी नगरी जयपुर दीपावली के पावन पर्व पर रोशनी से सराबोर है और शहर के प्रमुख बाजारों व इमारतों को भव्य रूप से सजाया गया है। अमर जवान ज्योति पर बर्फ से बनी भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाएं आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई हैं। नगर निगम औ

⏱ 3 मिनट का समय 👁 1,006
संस्कृति एवं मेले • 08 Nov 2026

सुल्ताना नगरपालिका की मुस्लिम अध्यक्ष ने सफाई कर्मचारियों के साथ दीपावली मनाकर पेश की कौमी एकता की मिसाल

झुंझुनूं जिले की सुल्ताना नगरपालिका की मुस्लिम अध्यक्ष सोनिया जींद ने दीपावली के पावन पर्व पर सफाई कर्मचारियों के साथ त्योहार मनाकर कौमी एकता की एक अनोखी मिसाल पेश की है। उन्होंने स्वच्छता व्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले इनर्मियों को सम्मानित करते हुए मिठ

⏱ 4 मिनट का समय 👁 1,009
संस्कृति एवं मेले • 08 Nov 2026

झुंझुनूं धरोहर: 193 साल पुरानी सोने की भित्ति चित्रों वाली साळ में होती है दीपावली पूजा

झुंझुनूं जिले के महनसर में पोदार परिवार द्वारा 1830 में निर्मित 'सोने की साळ' में दीपावली के पावन अवसर पर 193 साल पुराने सोने की स्याही से उकेरे गए भित्ति चित्रों की पूजा की जाती है। सेठ हरकंठराय पोद्दार द्वारा बनवाई गई इस 100 फीट लंबी साळ की दीवारों पर य

⏱ 4 मिनट का समय 👁 1,010
K
कोटपूतली न्यूज़ ऐप इंस्टॉल करें

फास्ट लोडिंग व मोबाइल ऐप अनुभव

🍪

हम बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव, विश्लेषण और प्रासंगिक विज्ञापनों (Google AdSense) के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं। गोपनीयता नीति पढ़ें

✓ Success